अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का नया दौर शुरू होने की तैयारी तेज हो गई है. हाल ही में घोषित मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड रवाना हो रहे हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का पहला दौर होने की उम्मीद है. रिपोर्ट के अनुसार, इस बातचीत का मुख्य फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संभावित न्यूक्लियर एग्रीमेंट पर रहेगा. बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीनियर सलाहकार जेरेड कुशनर पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं.
यह बातचीत पहले शुक्रवार (19 जून) को शुरू होनी थी, लेकिन लेबनान में इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव के कारण इसे टाल दिया गया. हालांकि, बाद में दोनों पक्षों के बीच सीजफायर लागू होने की खबर सामने आई. बताया गया कि यह सीजफायर अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से संभव हो पाया, जबकि ईरान ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई.
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नई तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं
फिलहाल बातचीत की नई तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. लेकिन सूत्रों के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शनिवार को स्विट्जरलैंड पहुंच सकते हैं. हालांकि यह भी कहा गया है कि क्षेत्रीय हालात के आधार पर उनकी यात्रा योजना बदल सकती है. सूत्रों के मुताबिक, लेबनान की स्थिति ईरान के लिए बेहद अहम बनी हुई है. ईरान साफ कर चुका है कि लेबनान में स्थायी सीजफायर उसके लिए अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाने की अहम शर्त है. ईरानी अधिकारियों का मानना है कि यह बातचीत के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है.
अमेरिका-ईरान डील में कतर की एंट्री
इस बीच,शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं. कतर को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आसान बनाने वाले प्रमुख मध्यस्थ देशों में गिना जा रहा है. स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच तय बातचीत फिलहाल टाल दी गई है. मंत्रालय ने कहा कि स्विट्जरलैंड इस बातचीत को आसान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है और बर्गेनस्टॉक में तैयारियां जारी हैं. अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-पॉइंट MoU में कई अहम बिंदु शामिल हैं. इसमें लेबनान समेत सैन्य गतिविधियों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की बात कही गई है. साथ ही 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर आगे बढ़ाया जा सकता है.
समझौते के तहत क्या करेगा अमेरिका?
समझौते के तहत अमेरिका ईरान पर लगी नेवल नाकाबंदी और कुछ प्रतिबंधों को हटाना शुरू करेगा. बदले में ईरान अगले 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित और मुफ्त रास्ता देगा. इसी दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तकनीकी बातचीत भी आगे बढ़ेगी. इस MoU में धीरे-धीरे प्रतिबंध हटाने, फ्रीज किए गए ईरानी एसेट्स को रिलीज करने, ईरानी तेल निर्यात के लिए अमेरिकी ट्रेजरी से राहत देने और ईरान के आर्थिक विकास के लिए अमेरिका समर्थित पुनर्निर्माण योजनाओं की बात भी शामिल है.
कतर ने की समर्थन देने की बात
कतर ने एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को समर्थन देने की बात कही है. कतर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बाकी मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए बातचीत ही सबसे बेहतर रास्ता है. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली यह वार्ता क्या वाकई मध्य पूर्व में तनाव कम करने और अमेरिका-ईरान संबंधों में नई शुरुआत का रास्ता खोल पाएगी या नहीं.
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