अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (23 सितंबर 2025) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र को संबोधित किया. उनका भाषण अमेरिकी विदेश नीति और रूसी तेल खरीद को लेकर केंद्रित था. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की कार्यशैली पर सवाल उठाया. ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का क्रेडिट लिया. उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा धोखा है.
ट्रंप के भाषण की 10 बड़ी बातें
1. डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनियाभर में 7 जंगों को रुकवाने का दावा किया. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कंबोडिया और थाईलैंड, कोसोवो और सर्बिया, कांगो और रवांडा, पाकिस्तान और भारत, इजरायल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया, आर्मेनिया और अजरबैजान जंग को खत्म कराया. भारत ने बार-बार सीजफायर पर ट्र्ंप के दावों को खारिज किया है. हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी मध्यस्थता में अमेरिका की भूमिका से इनकार किया.
2. अमेरिकी राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से एक बार फिर नोबेल पुरस्कार की मांग दोहराई. उन्होंने कहा, “हर कोई कहता है कि दुनिया में जंग रुकवाने के लिए मुझे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए. हालांकि मेरे लिए असली पुरस्कार यह है कि लाखों लोग अब जंग में नहीं मारे जा रहे हैं. मुझे मुझे इनाम की नहीं, बल्कि जान बचाने की परवाह है.“
3. ट्रंप ने अपनी विदेश नीति से जुड़े किसी भी काम में मदद न करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की. उन्होंने शुरुआत में खराब टेलीप्रॉम्पटर के जरिए यूएन पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यूएन के कार्य करने का तरीका खराब टेलीप्रॉम्पटर की तरह ही है. ट्रंप के भाषण के दौरान अचानक यूएन में टेलीप्रॉम्प्टर रूक गया था. इसके बाद उन्होंने कहा, “अगर यह नहीं काम कर रहा होता है तो आप ज्यादा दिल से बोलते हैं. जो भी इस टेलीप्रॉम्प्टर को चला रहा है वह बड़ी मुसीबत में है.”
4. अमेरिकी राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र पर अवैध रूप से अमेरिका में आने वाले लोगों का समर्थन करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अवैध रूप से अमेरिका में घुसने वालों पर वे कार्रवाई करते रहेंगे. उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र का काम जंग को रोकना है, न कि उन्हें पैदा करना और उन्हें फंडिंग करना.” ट्रंप ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र पश्चिमी देशों और उनकी सीमाओं पर हमले के लिए धन मुहैया करा रहा है.
5. ट्रंप ने अपने भाषण में यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया कि वे अब भी रूस से तेल और गैस खरीदकर उसकी मदद कर रहे हैं. ट्रंप ने कहा, “नाटो देशों ने भी रूसी ऊर्जा और उसके उत्पादों पर ज्यादा रोक नहीं लगाई है. वे (नाटो देश) अपने ही खिलाफ युद्ध को फंडिंग कर रहे हैं. वे रूस से लड़ रहे हैं और उसी से तेल खरीद रहा है ये शर्मनाक है.“
6. डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि भारत और चीन यूक्रेन में जारी युद्ध के लिए रूस को फंडिंग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, चीन और भारत रूसी तेल खरीद कर इस युद्ध को फंडिंग करने वाले मुख्य देश हैं.” उन्होंने कहा, नाटो देश भी रूसी ऊर्जा पर पर्याप्त रोक नहीं लगा पाए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर रूस युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर राजी नहीं हुआ तो अमेरिका उस पर कड़े टैरिफ लगाएगा. ट्रंप ने यूरोपीय देशों से भी अपील की कि वे अमेरिका का साथ दें और रूस पर ऐसे ही कदम उठाएं ताकि इस संघर्ष को जल्द खत्म किया जा सके. स्विट्जरलैंड, जर्मनी और ग्रीस का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, “आपके देश ओपन बॉर्डर पॉलिसी की वजह से नरक की ओर जा रहे हैं.“
7. फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले देशों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, “जंग को बढ़ावा देने के लिए कुछ लोग एकतरफा तौर पर फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की कोशिश कर रहे हैं. इससे हमास आतंकवादियों को उनके अत्याचारों के लिए बहुत बड़ा इनाम मिलेगा. यह 7 अक्टूबर (इजरायल में हुए हमले) सहित इन भयानक अत्याचारों का इनाम होगा.”
8. यूएनजीए को संबोधित करने के बाद ट्र्ंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “संयुक्त राष्ट्र के समक्ष भाषण देना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी. मुझे लगता है कि मेरे भाषण को बहुत सराहा गया, जो मुख्य रूप से ऊर्जा और इमिग्रेशन पर फोकस था. मैं इस बारे में काफी समय से बोल रहा हूं और यह फोरम, इन दो महत्वपूर्ण वक्तव्यों के लिहाज से सबसे बेहतरीन था.”
9. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “उम्मीद है कि हर कोई इसे देख पाएगा. जब हम मंच की ओर बढ़ रहे थे, तब टेलीप्रॉम्प्टर खराब हो गया था और एस्केलेटर अचानक रुक गया था, लेकिन इन दोनों घटनाओं ने शायद भाषण को और भी दिलचस्प बना दिया. संयुक्त राष्ट्र में भाषण देना हमेशा सम्मान की बात होती है, भले ही उनके उपकरण थोड़े खराब ही क्यों न हों. अमेरिका को फिर से महान बनाएं.“
10. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया. लंबी स्पीच की वजह से उनका भाषण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया. ट्रंप करीब एक घंटे तक बोलते रहे. UN के मुताबिक नेताओं को 15 मिनट की तय समय-सीमा दी जाती है. संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे लंबा भाषण 1960 में क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो ने दिया था. वह करीब 4.5 घंटे तक बोलते रहे थे. लीबिया के पूर्व राष्ट्रपति मुअम्मर गद्दाफी ने साल 2009 में करीब 1.5 घंटे से ज्यादा देर तक बोला था.