एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भारत से लौट रहे ईरानी फ्रिगेट (युद्धपोत) आईरिस देना (IRIS Dena) पर अमेरिकी हमले को लेकर सरकार से उसका रुख स्पष्ट करने को कहा है. उन्होंने हमले की कड़ी आलोचना की है और सरकार से भी अपील की है कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अमेरिकी कार्रवाई की निंदा करे.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर असदुद्दीन ओवैसी ने पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘अमेरिकी नौसेना के भारतीय जलक्षेत्र के इतने करीब ईरानी जहाज डुबोने को लेकर बहुत सारे सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिले हैं. जवाब सरकार को देने चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री चुप हैं. यह हमारे देश के लोगों के प्रति उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी को नजरअंदाज करना है.’
असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या ट्रंप प्रशासन ने ईरानी जहाज को निशाना बनाने से पहले उन्हें इसे लेकर सूचित किया था. उन्होंने पोस्ट में लिखा, ‘क्या ट्रंप प्रशासन ने भारतीय जलक्षेत्र के इतने करीब न्यूक्लियर सबमरीन इस्तेमाल करने और वॉर जोन को बढ़ाने का फैसला करने से पहले भारत सरकार को बताया था? आखिर हम भी क्वाड के सदस्य हैं और अमेरिका के रणनीतिक साझेदार हैं.’
असदुद्दीन ओवैसी ने पूछा, ‘अगर यह चीनी नौसेना के लिए इन जलक्षेत्र में काम करने का एक उदाहरण बन जाता है, तो क्या मोदी सरकार तब भी चुप रहेगी?’ ओवैसी ने एक और पोस्ट में लिखा, ‘अगर अमेरिका आसपास मौजूद दो अन्य ईरानी जहाजों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई दोहराता है, तो क्या सरकार तब भी रेत में सिर छिपाए शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार करेगी.’
असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा, ‘यह भारत की लंबे समय से बनी रणनीतिक संप्रभुता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है और हमें वैश्विक मंचों पर अप्रासंगिक बना सकता है.’ उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार इस घटना की स्पष्ट शब्दों में निंदा करे और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमले पर अपना विस्तृत रुख स्पष्ट करे.
अमेरिका ने बुधवार (4 मार्च, 2026) को ईरानी फ्रिगेट को टारपीडो के हमले में डुबो दिया था. यह कुछ दिन पहले ही भारत के साथ युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने के लिए आया था और यह ईरान वापस लौट रहा था, तभी श्रीलंका के पास इस पर हमला हुआ, जिसमें जहाज डूब गया और इसमें 80 से ज्यादा ईरानी नाविक मारे गए. ईरानी अधिकारियों का दावा है कि जहाज पर कोई हथियार नहीं था.