ईरान ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को साढ़े 7 साल जेल की सजा सुनाई, जानें क्या है पूरा मामला


ईरान ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को भूख हड़ताल शुरू करने के बाद 7 साल से अधिक जेल की सजा सुनाई है. समर्थकों ने रविवार (8 फरवरी) को यह जानकारी दी. देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के हाथों हजारों लोगों की मौत के बाद तेहरान हर असहमति को दबाने में जुटा है. 

APTN न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मदी के खिलाफ ये फैसला ऐसे समय में आया है, जब ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संभावित सैन्य हमले को टालने के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रहा है. ईरान के शीर्ष राजनयिक ने रविवार को जोर देकर कहा कि तेहरान की ताकत महान शक्तियों को ना कहने की उसकी क्षमता से आती है. अमेरिका के साथ ओमान में हुई बातचीत के ठीक बाद उनका ये अतिवादी रुख सामने आया है. 

मोहम्मदी के वकील ने क्या बताया  
वकील मुस्तफा नीली ने एक्स पर पोस्ट कर सजा सुनाए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह फैसला शनिवार को मशहद शहर की एक क्रांतिकारी अदालत ने सुनाया था. ऐसी अदालतें आमतौर पर आरोपियों को अपने आरोपों का खंडन करने का बहुत कम या बिल्कुल भी मौका दिए बिना ही फैसला सुना देती हैं. उन्होंने लिखा, “उसे लोगों को एकजुट करने और साजिश रचने के आरोप में 6 साल और प्रचार के आरोप में डेढ़ साल की जेल और 2 साल के लिए यात्रा प्रतिबंध की सजा सुनाई गई है.”

वकील ने बताया कि उन्हें राजधानी तेहरान से लगभग 740 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित खोसफ शहर में 2 साल के आंतरिक निर्वासन की सजा सुनाई गई है. मोहम्मदी के समर्थकों का कहना है कि मोहम्मदी 2 फरवरी से भूख हड़ताल पर हैं. उन्हें दिसंबर में मशहद में रहने वाले 46 वर्षीय ईरानी वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता खसरो अलीकोर्डी के सम्मान समारोह में गिरफ्तार किया गया था. प्रदर्शन के फुटेज में उन्हें अलीकोर्डी और अन्य लोगों के लिए न्याय की मांग करते हुए चिल्लाते हुए दिखाया गया है.

चिकित्सा कारणों से हुई थी रिहाई
दिसंबर में उनकी गिरफ्तारी से महीनों पहले ही समर्थकों ने चेतावनी दी थी कि 53 वर्षीय मोहम्मदी को दिसंबर 2024 में चिकित्सा कारणों से मिली तीन सप्ताह की छुट्टी के बाद दोबारा जेल भेजे जाने का खतरा है. हालांकि यह छुट्टी केवल तीन सप्ताह के लिए थी, लेकिन मोहम्मदी की जेल से रिहाई की अवधि बढ़ गई. जून में ईरान और इजरायल के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध के दौरान भी वह जेल से बाहर रहीं.

मोहम्मदी ने विरोध प्रदर्शनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उपस्थिति के जरिए अपनी सक्रियता जारी रखी, जिसमें एक बार तेहरान की कुख्यात एविन जेल के सामने प्रदर्शन करना भी शामिल था, जहां उन्हें रखा गया था. ईरानी सरकार के खिलाफ राज्य सुरक्षा के विरुद्ध मिलीभगत और दुष्प्रचार के आरोपों में मोहम्मदी 13 साल और 9 महीने जेल की सजा काट रही थीं.

महसा अमिनी की मौत के बाद प्रदर्शनों का किया था समर्थन
उन्होंने 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद भड़के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों का भी समर्थन किया था, जिनमें महिलाओं ने हिजाब न पहनकर सरकार के खिलाफ खुलकर विरोध जताया था. मोहम्मदी के समर्थकों का कहना है कि जेल में रहने के दौरान उन्हें कई बार दिल का दौरा पड़ा और 2022 में उनकी आपातकालीन सर्जरी हुई.

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