‘उकसावे वाली कार्रवाई का कड़ा जवाब…’, चीन ने अरुणाचल पर किया दावा तो उद्धव गुट का आया रिएक्शन


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चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश पर दावा करने के बाद शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसके विपरीत चीन के विदेश मंत्रालय के किसी भी दावे को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंन कहा कि मैं उम्मीद करती हूं कि भारतीय विदेश मंत्रालय चीन की ओर से इस जानबूझकर की गई उकसावे वाली कार्रवाई का कड़ा और स्पष्ट जवाब देगी.

चीन का दावा भारत की संप्रभुता का उल्लंघन- प्रियंका चतुर्वेदी

राज्यसभा में शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ‘चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से किया गया यह दावा भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता का खुले तौर पर उल्लंघन करती है. चीन का यह कदम उस भरोसे पर भी सवाल उठाता है कि चीन भारत के साथ अपने रिश्तों को सुधारने की तरफ आगे बढ़कर काम कर रही है, जो गलवान घाटी में भारत और चीनी सैना के बीच झड़प के बाद से तनावपूर्ण चल रहे थे.’

अरुणाचल प्रदेश की महिला को चीन ने 18 घंटे तक रखा था हिरासत में

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ‘बीते दिन सोमवार (24 नवंबर, 2025) को जब इस बात का खुलासा हुआ कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली एक महिला को 18 घंटे तक हिरासत में रखकर टॉर्चर किया था, तब इस बात से पूरा भारत आक्रोशित हो उठा था. चीन के अधिकारियों ने लंदन से शंघाई होते हुए जापान जा रही अरुणाचल प्रदेश की निवासी महिला के पासपोर्ट को अमान्य घोषित कर दिया था. यहां तक उसके भारतीय नागरिकता पर सवाल किए गए थे और उससे यह कहा था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का नहीं चीन का हिस्सा है.’

चीन को वन इंडिया पॉलिसी को मानना होगा- प्रियंका चतुर्वेदी

प्रियंका चतुर्वेदी ने पूर्व विदेश मंत्री और दिवंगत नेता सुषमा स्वराज का जिक्र करते हुए कहा, ‘मुझे याद कि जब साल 2014 में भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन के अपने समकक्ष वांग यी से मुलाकात की थी, तब वांग यी ने सुषमा स्वराज से कहा था कि भारत को वन चाइना पॉलिसी को मानना चाहिए, लेकिन पहले चीन को वन इंडिया पॉलिसी को मानना होगा.’

उन्होंने कहा, ‘भारत की राष्ट्रीय संप्रभुता और भारत का क्षेत्रीय स्वामित्व किसी भी तरह के चर्चा का विषय नहीं है और न ही यह किसी विवाद का विषय है और चीन की ओर से किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई उस भरोसे पर सवाल उठाती है कि चीन भारत के साथ अपने रिश्ते को सुधारना चाहता है.’

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