एयर इंडिया प्लेन क्रैश: प्रारंभिक रिपोर्ट को अंतिम निष्कर्ष मानना गलत होगा… जानिए जांच पर क्या कहना है एक्स्पर्ट का?


Air India Plane crash Report:  अहमदाबाद में 12 जून को हुए एयर इंडिया ड्रीमलाइनर विमान हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद देशभर में चर्चा तेज हो गई है. इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी. रिपोर्ट आने के बाद जहां कई सवाल उठ रहे हैं, वहीं एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) के पूर्व महानिदेशक ग्रुप कैप्टन औरबिंदो हांडा (सेवानिवृत्त) ने लोगों को जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से सावधान किया है.

उन्होंने NDTV Profit से बातचीत में कहा, ‘प्रारंभिक रिपोर्ट और अंतिम रिपोर्ट अक्सर अलग होती हैं. इसलिए फिलहाल जो तथ्य सामने आए हैं वो केवल शुरुआती संकेत हैं.’ उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद 100 से अधिक विमान हादसों की जांच की है, जिनमें 2020 का कोझिकोड हादसा भी शामिल है.

हादसा बेहद गंभीर, विमान 90% तक जला
12 जून को फ्लाइट AI-171, जो बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर थी, अहमदाबाद से उड़ान भरने के सिर्फ 32 सेकेंड बाद एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकरा गई. यह हादसा भारत की सबसे बड़ी विमान दुर्घटनाओं में से एक बन गया. विमान में सवार 241 यात्रियों में से केवल एक व्यक्ति ही बच पाया, जबकि 20 से अधिक लोग जमीन पर भी मारे गए. हांडा ने बताया कि यह हादसा इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि विमान का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा जल चुका है, जिससे जांच में कई तकनीकी बाधाएं आ सकती हैं.

फ्यूल कटऑफ स्विच कैसे बंद हुआ, अभी रहस्य
AAIB की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद ही दोनों इंजन बंद हो गए. रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्यूल कटऑफ स्विच, जो इंजन में ईंधन की आपूर्ति को नियंत्रित करता है, ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ की स्थिति में एक सेकंड के अंदर चले गए. इससे इंजन में फ्यूल जाना बंद हो गया और थ्रस्ट खत्म हो गया.

कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) में एक पायलट को यह कहते सुना गया -‘तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?’ दूसरा पायलट जवाब देता है – ‘मैंने नहीं किया.’ इससे सवाल उठता है कि क्या फ्यूल स्विच खुद-ब-खुद ट्रिगर हुए या कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई.

‘प्रारंभिक रिपोर्ट को अंतिम नहीं मानना चाहिए’
ग्रुप कैप्टन हांडा ने साफ कहा, ‘अभी जो रिपोर्ट आई है, वह केवल 30 सेकंड की घटनाओं की जानकारी देती है. इसमें किसी पर आरोप नहीं लगाया गया है और यह निष्कर्ष नहीं है.’ उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में शुरुआती रिपोर्ट और अंतिम निष्कर्ष अलग होते हैं, इसलिए किसी दिशा में राय बनाना जल्दबाजी होगी.

ब्लैक बॉक्स से मिले जरूरी डेटा
जब उनसे पूछा गया कि क्या ब्लैक बॉक्स (जिसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर होते हैं) को डेटा निकालने के लिए बोइंग या किसी अन्य मैन्युफैक्चरर के पास भेजना पड़ेगा, तो उन्होंने कहा – ‘मुझे नहीं लगता ऐसा करने की जरूरत है. शुरुआत से लेकर क्रैश तक का सारा डेटा जांच टीम के पास मौजूद है.’

जांच होगी बेहद पेचीदा और लंबी
हांडा ने बताया कि इस मामले में हर संभावित तकनीकी वजह का सिमुलेशन किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘कोझिकोड हादसे की तुलना में यह हादसा ज्यादा मुश्किल है क्योंकि वहां विमान की संरचना बची थी, लेकिन यहां ऐसा नहीं है.’ कोझिकोड हादसे में एक बोइंग 737 रनवे से फिसलकर टूट गया था, जिसमें 21 लोगों की मौत हुई थी.

अंतिम रिपोर्ट की समयसीमा तय नहीं
क्या इस हादसे की अंतिम रिपोर्ट ICAO (अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन) द्वारा निर्धारित 12 महीने के भीतर आएगी? इस सवाल पर ग्रुप कैप्टन हांडा ने जवाब दिया- ‘हमें चमत्कार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. विमान हादसे की जांच एक बेहद विस्तृत और जटिल प्रक्रिया है.’

उन्होंने बताया कि जांच ICAO के मैन्युअल के अनुसार की जाएगी, जिसे AAIB ने भी अपनाया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि AAIB की टीम पूरी कोशिश करेगी कि रिपोर्ट जल्द से जल्द आए, लेकिन वास्तविक समय इस बात पर निर्भर करेगा कि जांच के दौरान कौन-सी जानकारियां सामने आती हैं. उन्होंने साफ कहा- ‘कोई भी, यहां तक कि वर्तमान AAIB प्रमुख भी यह नहीं कह सकते कि अंतिम रिपोर्ट कब आएगी.’



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