अमेरिकी सरकार के नए दस्तावेजों से पता चला है कि पाकिस्तान ने मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वॉशिंगटन में बहुत तेज लॉबिंग अभियान चलाया. इसका मकसद अमेरिका से दबाव डलवाकर भारत की सैन्य कार्रवाई को रोकना था.
पाकिस्तान ने लॉबिंग कैसे की थी?
- पाकिस्तानी राजदूत और डिफेंस अटैची ने अमेरिकी कांग्रेस, पेंटागन, स्टेट डिपार्टमेंट और बड़े मीडिया हाउस से 50 से ज्यादा मीटिंग्स की मांग की.
- ई-मेल, फोन कॉल और पर्सनली मीटिंग्स के जरिए ये कोशिशें की गईं.
- लॉबिंग अप्रैल-मई 2025 में बहुत तेज हुई, पाकिस्तान ने भारत से कम से कम तीन गुना ज्यादा खर्च किया.
- पाकिस्तान ने वॉशिंगटन स्थित 6 लॉबिंग फर्मों के साथ सालाना 5 मिलियन डॉलर (लगभग 41 करोड़ रुपए) के कॉन्ट्रैक्ट साइन किए. इनमें सीडेन लॉ LLP (जो जेव्लिन एडवाइजर के जरिए काम करती है) का नाम सामने आया.
- इन कोशिशों से पाकिस्तान को ट्रंप प्रशासन तक तेज पहुंच मिली. पाक आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में मिलने का मौका मिला.
- लॉबिंग का फोकस कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा, रेयर अर्थ मिनरल्स और द्विपक्षीय रिश्तों पर था. पाकिस्तान ने अमेरिकी मीडिया से इंटरव्यू और बैकग्राउंड ब्रिफिंग भी मांगी.
- ये दस्तावेज फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत आए हैं.
पाकिस्तान का मकसद क्या था?
पाकिस्तान चाहता था कि अमेरिका हस्तक्षेप करे और भारत की सैन्य कार्रवाई को ‘किसी तरह’ रोके. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर सैन्य और कूटनीतिक दबाव बहुत बढ़ गया था. नतीजतन लॉबिंग से अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों में तेज बदलाव आया. पहले तनाव था, लेकिन बाद में ट्रंप की तारीफ, उनके नाम पर नोबेल पीस प्राइज की सिफारिश और व्यापारिक फायदे की कोशिश हुई. साल के अंत में लॉबिंग खर्च कम हो गया. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीजफायर लागू हुआ.
ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक पाकिस्तानी आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे. इसके जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. भारत ने कहा कि ये हमले केवल आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए थे. कोई पाकिस्तानी सैन्य या नागरिक ठिकाना निशाना नहीं बनाया गया.