कजाकिस्तान के साथ बीते बुधवार को पाकिस्तान ने एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया. पाकिस्तान ने इसे जारी करते हुए दावा किया कि दोनों देश कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के मुताबिक हल करने का समर्थन करते हैं. वहीं हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है. पाकिस्तान के दावों के विपरीत कजाकिस्तान की आधिकारिक वेबसाइट और वहां की सरकारी समाचार एजेंसी ने कश्मीर मुद्दे का कोई जिक्र ही नहीं किया है.
कजाकिस्तान की तरफ से जारी आधिकारिक दस्तावेजों में केवल आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी और व्यापारिक समझौतों की बात कही गई है. वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संयुक्त घोषणा के पैराग्राफ 15 में कई बार कश्मीर का जिक्र किया गया है.
किन-किन चीजों को लेकर हुआ है समझौता
पाकिस्तान और कजाकिस्तान के बीच कुल 37 से 60 के बीच समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं. खनिज उद्योग और भू-वैज्ञानिक विज्ञान में सहयोग, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में इकाइयों की संयुक्त तैनाती पर समझौता. कराची और ग्वादर बंदरगाहों तक कजाकिस्तान की पहुंच और ट्रांस-कैस्पियन परिवहन गलियारे पर चर्चा समेत कई अन्य समझौते शामिल हैं. इन सबके अलावा दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग पर भी बात की गई है.
अब तक कश्मीर पर तटस्थ रहा है कजाकिस्तान
जानकारी के लिए बता दें कि कजाकिस्तान हमेशा से परंपरागत रूप से कश्मीर मुद्दे पर एक तटस्थ रुख अपनाता रहा है और भारत के साथ उसके गहरे सामरिक और आर्थिक संबंध हैं. भारत हमेशा से कश्मीर को एक द्विपक्षीय मुद्दा मानता रहा है और किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के पुराने संदर्भों का विरोध करता रहा है.
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कजाकिस्तान ने वास्तव में इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं तो यह भारत के साथ उसके संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है. हालांकि कजाकिस्तान की ओर से आधिकारिक पुष्टि न होना यह संकेत देता है कि यह पाकिस्तान की ओर से किया गया ये सिर्फ चालबाजी हो सकती है.
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