कितनी खतरनाक है बलूचिस्तान की मजीद ब्रिगेड, जिसका नाम सुनते ही कांप जाती है पाकिस्तान की सेना?


पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोह की आग फिर से सुलग गई है. यहां लगातार हो रहे हमले और विद्रोह आजकल सुर्खियों में बने हुए हैं. यहां की बलोच लिबरेशन आर्मी ने ऑपरेशन हेरोफ 2.0 को अंजाम दिया है. इसने पाकिस्तान और सिक्योरिटी सिस्टम की परत खोलकर रख दी हैं. बलोच लड़ाकों ने एक साथ कई शहरों में हमले किए. साथ ही पुलिस और सेना की चौकियों पर कब्जा कर लिया है. कई जगह पर सेना पीछे भी हटी है. बलूच लड़ाकों की तीन यूनिट मजीद ब्रिगेड, फतेह स्क्वाड और STOS ने ज्वाइंट ऑपरेशन किया है. इसमें जिसने तबाही मचाई है, वो मजीद ब्रिगेड है. मजीद ब्रिगेड आत्मघाती हमलों के लिए जानी जाती है. 

मजीद ब्रिगेड ने हेरोफ 2.0 में अहम रोल निभाया

इस ब्रिगेड ने हेरोफ 2.0 में अहम भूमिका निभाई. इसमें कई महिलाएं भी शामिल थीं. इनमें हवा बलोच और असिफा मेंगल महिला फिदाइन ने ग्वादर और नुश्की में आईएसआई और सीटीडी के ठिकानों पर हमले किए. यह हमले वाहनों पर लगे बम के जरिए किया गया था. इस हमले में ब्रिगेड के 18 लड़ाके मारे गए. इनमें मजीद ब्रिगेड के 11 फिदायिन भी थे. इधर, अमेरिका ने 2025 में मजीद ब्रिगेड और बीएलए को फॉरेन टेरेरिस्ट ऑर्गेनाइजेशन माना है. 

पाकिस्तान की सेना भी कांपती है मजीद ब्रिगेड से

मजीद ब्रिगेड से पाकिस्तानी की सेना में भी दहशत रहती है. यह 2011 में बनी थी. यह बलोच आर्मी की स्पेशल फोर्सेज यूनिट है. इसका टारगेट आत्मघाती हमला करना है. इसने कई बड़े हमले पिछले कुछ वक्त में किए हैं. इनमें कराची स्टॉक एक्सचेंज पर 2020 में हुआ धमाका, 2024 में कराची एयरपोर्ट पर आत्मघाती हमला जैसी घटनाएं शामिल है. 

दो भाईयों के नाम पर रखा है मजीद ब्रिगेड का नाम

इस ब्रिगेड को साल 2010-11 में बनाया गया था. इसे बीएलए के पूर्व नेता असलम अचू ने बनाया था. इसका नाम दो भाइयों मजीद लंगोव सीनियर और मजीद लंगोव जिनयर के नाम पर रखा गया था. मजीद लंगोव सीनियर 1974 में जुल्फिकार अली भुट्टो पर हमले की कोशिश में मारा गया था. मजीद लंगोव जूनियर 2010 में सुरक्षा बल के एक ऑपरेशन के दौरान मारे गए थे. उन्हीं के सम्मान में इस ब्रिगेड को बनाया गया था. 



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