क्या किसी भी देश में घुसकर हमला कर सकता है अमेरिका? वेनेजुएला के बाद इन दो देशों पर बुरी नजर


अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. इस मामले के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप पूरी दुनिया में चर्चा में हैं. ट्रंप ने आरोप लगाया है कि मादुरो ने ड्रग्स के खिलाफ एक्शन नहीं लिया. ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने वेनेजुएला में घुसकर अटैक किया, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका किसी दूसरे देश में इस तरह से घुसकर एक्शन ले सकता है. उसकी विदेश नीति क्या है और संयुक्त राष्ट्र का इसको लेकर क्या नियम है.

अंतरराष्ट्रीय कानून या फिर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक किसी भी संप्रभु देश पर बल का इस्तेमाल करना या यूं कहें कि उस पर हमला कर देना वैध नहीं है. सिर्फ दो ही परिस्थितियों में सैन्य कार्रवाई को वैध माना जा सकता है. पहली परिस्थिति आत्मरक्षा है. अगर कोई देश दूसरे देश पर अटैक कर रहा है तो वह सेल्फ डिफेंस में एक्शन ले सकता है. वहीं दूसरी परिस्थिति संयुक्त राष्ट्र की अनुमति को लेकर है. अगर यूएन सिक्योरिटी काउंसिल सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे तो एक्शन लिया जा सकता है.

क्या कहती है अमेरिका की विदेश नीति

‘कॉर्नेल लॉ स्कूल’ की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की विदेश नीति तीन परिस्थितियों में किसी दूसरे देश पर हमला कर सकता है.

  • पहला परिस्थिति यह है कि अगर राष्ट्रीय हित का मसला हो, जैसे नागरिक सुरक्षा या देश पर खतरा, तब वह अटैक कर सकता है. 
  • दूसरी परिस्थिति यह है कि वह किसी भी आतंकवादी संगठन के खिलाफ एक्शन ले सकता है, भले ही आतंकी किसी और देश में हों. 
  • तीसरी परिस्थिति यह है कि कोई दूसरा देश अमेरिका पर पहले अटैक करेगा तो वह एक्शन ले सकता है.

मनमानी नहीं कर सकता अमेरिका

अहम बात यह है कि अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र मनमानी करने की अनुमति नहीं देता है, लेकिन फिर भी उस पर कई बार इसके आरोप लगते रहे हैं. अमेरिका ने कई बार संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना ही एक्शन ले लिया है. वेनेजुएला के मामले में भी यही किया गया.

वेनेजुएला के बाद किन दो देशों पर ट्रंप की नजर

ट्रंप की वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा और डेनमार्क पर बुरी नजर है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा कि क्यूबा काफी मुसीबत में है. रुबियो ने भविष्य के कदमों पर बोलने से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन क्यूबा सरकार का समर्थक नहीं रहा है और उसने मादुरो को सहारा दिया. वहीं अमेरिका ने डेनमार्क को भी चेतावनी दी है. यूएस की तरफ ग्रीनलैंड को लेकर बयान दिया गया.



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