चीन में भारतीय सभ्यता की गूंज, धूमधाम से मनाया गया विश्व हिंदी दिवस


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चीन के शंघाई शहर में स्थित भारत के वाणिज्य दूतावास ने प्रधान वाणिज्य दूत प्रतीक माथुर की अगुवाई में विश्व हिंदी दिवस बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया. हिंदी की गरिमा और वैभव को उजागर करते हुए मुख्य वाणिज्य दूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश पढ़ा, जिसमें लिखा कि हिंदी केवल एक भाषा मात्र नहीं, बल्कि भारत की संवेदना, संस्कार और चिंतन को विश्व तक पहुंचाने वाली सशक्त कड़ी है.

पीएम मोदी का यह संदेश सभी एकत्रित भारतीय समुदाय के मित्रों के बीच साझा किया गया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में अन्य देशों के राजदूत भी उपस्थित थे. पूर्वी चीन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों Fudan, SISU और ECNU के छात्रों एवं शिक्षकों ने इस विशेष मौके पर अपनी रचनाएं और विचार सभी श्रोताओं के साथ साझा किए, जिससे मंच और अधिक जीवंत हो उठा.

शंघाई रंगमंच अकादमी के बच्चे भी हुए शामिल
एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को जीवंत करने के लिए एक भव्य रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शंघाई रंगमंच अकादमी के प्रतिभाशाली बच्चे भी शामिल हुए. साथ ही, भारतनाट्यम में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाली छात्राओं को सभा में सम्मानित किया गया. हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को चमकाते हुए सोमनाथ मंदिर पर लहराते राष्ट्र के तिरंगे का सभी ने गर्व से अनुसरण किया.

 
वीरांगना सुनीता मेहता ने अपनी स्वरचित कविता “कर्तव्य की अंतिम पंक्ति” पढ़ी, जो अपने दिवंगत पति ब्रिगेडियर रवि दत्त मेहता (कीर्ति चक्र से सम्मानित) को समर्पित थी. कविता सुनते ही सभा भाव-विभोर हो उठी. आधुनिक नाटककार मोहन राकेश के अमर नाटक “आषाढ़ का एक दिन” का मंचन शंघाई में रह रहे भारतीयों द्वारा किया गया था और शंघाई थिएटर अकादमी ने इसका चीनी अनुवाद भी प्रस्तुत किया. 

यह भारतीय साहित्य को चीन में लोकप्रिय बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है. सभी राष्ट्रभक्त प्रतिभागियों को सम्मानित करने के बाद मुख्य वाणिज्य दूत ने सभा को संबोधित करते हुए भाषा विशेषकर हिंदी हमारी राजभाषा के हमारे दैनिक जीवन और वैश्विक मंच पर महत्व को विस्तार से बताया.

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