ट्रंप से घबराए या तख्तापलट से, शी जिनपिंग के चीन में ये क्या हो रहा है?


चीन में माओ-त्से-तुंग से भी ताकतवर बन चुके शी जिनपिंग की घबराहट अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की बढ़ती ताकत से है या फिर उन्हें असल डर अपने तख्तापलट का है. वजह चाहे जो हो, लेकिन अब चीन में शी जिनपिंग अपने सबसे करीबियों को भी किनारे लगाते जा रहे हैं. और ऐसा करते-करते वो इतना अकेले पड़ चुके हैं कि उनके फैसले न सिर्फ उनकी सत्ता को चुनौती देने लगे हैं, बल्कि सवाल अब उस चीन पर भी उठने लगे हैं, जिसे बनाने वाले माओ-त्से-तुंग के सामने दुनिया की कोई भी ताकत सिर उठाने की कोशिश भी नहीं कर पाती थी.

तो सवाल है कि आखिर चीन में हो क्या रहा है. क्या शी जिनपिंग के दोस्त ने ही अमेरिका को न्यूक्लियर हथियारों का सीक्रेट लीक कर दिया था या फिर असल में ये कोशिश शी जिनपिंग का तख्तापलट करने की थी, जिसे वक्त रहते जिनपिंग ने भांप लिया और अपने दोस्त को ही किनारे कर दिया. आखिर पिछले कुछ दिनों में चीन में ऐसा क्या हुआ है कि शी को अपनी कुर्सी पर ही खतरा मंडराने लगा है, आज क्लियर कट बात होगी इसी मुद्दे पर.

चीन में हथियारबंद फोर्स को कमांड करने वाली संस्था का नाम है सेंट्रल मिलिट्री कमीशन. इसका मुखिया कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का सुप्रीम कमांडर होता है और इस नाते इसके मुखिया हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग. इस सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में शी जिनपिंग के नीचे कुल सात लोग होते हैं. और यही लोग मिलकर पूरी चीनी सेना को कमांड करते हैं, लेकिन इस सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में अब महज दो ही लोग रह गए हैं. खुद शी जिनपिंग और दूसरे उनके एक और विश्वस्त जनरल झांग शेंगमिन.

बाकी के पांच लोग अलग-अलग भ्रष्टाचार के आरोप में इस कमीशन से हटा दिए गए हैं और सबके खिलाफ जांच शुरू हो गई है. इनमें सबसे पहले हटाए गए थे चीन के तत्कालीन रक्षा मंत्री ली शांगफू. साल 2023 में उन्हें अचानक से रक्षा मंत्री के पद से बर्खास्त कर दिया गया. जून 2024 में भ्रष्टाचार के आरोपों में कम्युनिस्ट पार्टी से भी उन्हें निकाल दिया गया. फिर नंबर आया वेई फेंघे का. वो भी रक्षा मंत्री हुआ करते थे, लेकिन जून 2024 में उन्हें भी हटा दिया गया. फिर नवंबर 2024 में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के पॉलिटिकल विंग के डायरेक्टर को पद से हटा दिया गया और उनके खिलाफ जांच शुरू हो गई.

जब अक्टूबर 2025 में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के एक वाइस चेयरमैन हे वेइदोंग को पहले पार्टी और फिर सेना से निकाला गया तो सवाल उठने लगे कि आखिर हो क्या रहा है. क्योंकि हे वेइदोंग शी जिनपिंग के काफी करीबी थे. अभी इसपर और बात होती उससे पहले ही जनवरी 2026 में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के सबसे सीनियर वाइस चेयरमैन झांग युक्सिया को भी पद से हटा दिया गया और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अनुशासन उल्लंघन के गंभीर आरोपों की जांच शुरू हो गई. इनके साथ ही साथ जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के हेड लियू झेनली को भी जब पद से हटा दिया गया और जांच एजेंसियों ने पूछताछ शुरू की तो समझ आया कि गड़बड़ सिर्फ उतनी ही नहीं है, जितनी दिखती है बल्कि गड़बड़ी बहुत ही बड़ी है और अब खतरा सीधे शी जिनपिंग को है.

इसकी वजह ये है कि झांग युक्सिया कोई सामान्य मिलिट्री जनरल नहीं थे. बल्कि ये वो मिलिट्री जनरल थे, जो शी जिनपिंग के इतने करीब थे, जितना चीन में शायद ही कोई दूसरा अधिकारी रहा हो. और इसकी वजह है शी जिनपिंग और झांग युक्सिया का प्रिंसलिंग होना. चीन में प्रिंसलिंग उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिनके पिता माओ-त्से-तुंग के वक्त भी चीन की सेना में रहे थे और माओ के साथ काम कर चुके थे. आम भाषा में ऐसे बच्चों को राजकुमार कह सकते हैं. तो शी जिनपिंग के पिता शी जॉनसांग और झांग युक्सिया के पिता झांग जोंगसुन दोनों ही माओ के लिए काम करते थे. दोनों के बीच दोस्ती थी. और यहीं से शी जिनपिंग और झांग युक्सिया के बीच भी स्वाभाविक दोस्ती हो गई थी. क्योंकि दोनों ही प्रिंसलिंग थे, दोनों ही राजकुमार थे.

लेकिन शी ने शायद अपनी राजनीति का सबक माओ-त्से-तुंग से ही सीखा है. शी जिनपिंग के पिता शी जॉनसांग ने माओ को उनके लॉन्ग मार्च में भी मदद की थी. बाकायदा यनान में शरण भी दी थी. लेकिन जब माओ ने सत्ता संभाली और उन्हें शी जॉनसांग से भी खतरा नजर आया तो उन्होंने शी जॉनसांग को भी गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया था. और उस वक्त शी जिनपिंग की उम्र महज 10 साल की थी, जिन्हें पिता के जेल जाने के बाद दर-दर भटकना पड़ा था, मजदूरी करनी पड़ी थी और ऐसा भी वक्त देखना पड़ा था जब दो वक्त का खाना भी नसीब न हो.

तो शी जिनपिंग की ट्रेनिंग माओ वाली है, वो अपने या पराए किसी को भी नहीं बख्शते. लिहाजा जब 24 जनवरी को शी जिनपिंग ने झांग युक्सिया को गिरफ्तार करने का आदेश दिया, तो सवाल सिर्फ एक था कि अभी क्यों. क्योंकि जिन आरोपों की वजह से शी जिनपिंग ने झांग को गिरफ्तार करवाया, वैसे आरोप तो कई अधिकारियों पर लग चुके थे, उन्हें पद से भी हटाया गया था, उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी और सबकुछ इतनी शांति से हुआ था कि किसी को कानो कान खबर भी नहीं लगी थी. तो फिर झांग की गिरफ्तारी को लेकर, उनकी जांच को लेकर शी ने खबर सबके पास क्यों पहुंचने दी.

क्योंकि शी जिनपिंग चाहते थे कि लोगों के पास ये खबर पहुंचे. वो चाहते थे कि चीन की सेना के हर अधिकारी के मन में शी जिनपिंग के नाम की दहशत हो. वो चाहते थे कि शी जिनपिंग के खिलाफ सर उठाने से पहले हर कोई हजार बार सोचे. क्योंकि शी के पास सत्ता तभी तक है, जब तक उऩकी दहशत है. और अभी अगले ही साल 2027 में पार्टी कांग्रेस होने वाली है. हर पांच साल में होने वाली इस पार्टी कांग्रेस का आयोजन बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में किया जाता है, जिसमें पूरे चीन से करीब 2300 डेलिगेट्स हिस्सा लेते हैं.

करीब एक हफ्ते तक चलने वाली इस मीटिंग में सेंट्रल कमिटी का चुनाव होता है, जो आगे चलकर देश के सबसे शक्तिशाली नेताओं जैसे पोलितब्यूरो और जनरल सेक्रेटरी का चुनाव करती है. साथ ही पार्टी के चार्टर या संविधान में कोई भी बड़ा बदलाव इसी सम्मेलन में किया जाता है. बाकी इस मीटिंग में ही चीन का अगले पांच-10 साल का रोडमैप भी तैयार किया जाता है. ऐसे में इस कांग्रेस के दौरान शी जिनपिंग को कोई भी किसी तरह की चुनौती न दे सके, इसके लिए शी जिनपिंग अभी से ही ऐसी प्लानिंग में जुटे हुए हैं. और अपने सबसे करीबी दोस्त को गिरफ्तार करवाने का आदेश देना भी जिनपिंग के उसी प्लान का एक हिस्सा है.

बाकी कहने वाले कहते रहें कि झांग अमेरिका को सीक्रेट न्यूक्लियर रिपोर्ट लीक कर रहे थे, या वो हथियारों की खरीद-फरोख्त में भ्रष्टाचार कर रहे थे या वो चीन की सेना में इतने ताकतवर बन गए थे कि वो शी को चुनौती दे सकते थे. ये सब कहने-सुनने की बातें हैं. सच बस ये है कि शी जिनपिंग नेटफ्लिक्स के शो सेक्रेड गेम्स की तरह हो गए हैं, जिसमें सब मारे जाएंगे सिर्फ त्रिवेदी बचेगा. शी जिनपिंग चीन के सेक्रेड गेम्स के वही त्रिवेदी हैं. जिन्हें जिंदा रहने के लिए सिर्फ वो लोग चाहिए जो मिर्जापुर वाले गुनगुन की तरह किसी काम से मना नहीं करें.  

झांग दोस्त थे और अनुभवी जनरल भी तो वो हो सकता है कि ताइवान पर हमले से इनकार भी कर सकते थे, जिसके लिए शी जिनपिंग पीपल्स लिबरेशन आर्मी को तैयार कर रहे हैं. हो सकता है कि उन्हें सत्ता की वो तमाम कमजोरियां भी पता हों, जो 70 साल के शी को उनका अगला उत्तराधिकारी चुनने से रोक रही हों. हो तो ये भी सकता है कि चीन के लिए तमाम उपलब्धियां हासिल करने के बाद झांग महज एक नजीर के तौर पर इस्तेमाल किए जाएं, जिसके जरिए शी जिनपिंग अपना खौफ, अपनी सत्ता और अपना दबदबा पूरे चीन और उसके हर एक संगठन पर बनाए रख सकें.

 

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