‘…तो और समय मांग लेते’, आपराधिक मामले की सुनवाई को लेकर मजिस्ट्रेट जज पर भड़का सुप्रीम कोर्ट



सुप्रीम कोर्ट ने एक निचली अदालत के जज को लेकर इस बात पर नाराजगी जताई कि उन्होंने मामले को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का होने का हवाला देते सुनवाई से इनकार कर दिया. जज को चार हफ्ते के अंदर एक आपराधिक मामले का निपटारा करना था, लेकिन उन्होंने कहा कि चार हफ्ते की अवधि बीत चुकी है इसलिए वह सुनवाई नहीं करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अवधि बढ़ाने का आग्रह भी कर सकते थे.

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस पी बी वराले की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही था. उन्होंने कहा कि 18 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक अपील का निपटारा करते हुए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के अलीपुर में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को चार हफ्ते के अंदर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया था, जिस पर मजिस्ट्रेट जज ने निर्धारित अवधि के भीतर मामले का निपटारा करने में असमर्थता जताते हुए इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला बताया.

बेंच ने जज के फैसले पर नाराजगी जताई और कहा, ‘हमें यह देखकर दुख हुआ है कि जज ने किस तरह से आदेश पारित किया. अगर किसी कारण से वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई निर्धारित समय अवधि के अंदर मामले का निपटारा करने में सक्षम नहीं थे, तो उनके पास समय बढ़ाने का आग्रह करने का मौका था, लेकिन वह यह नहीं कह सकते कि उनका अधिकार क्षेत्र खत्म हो गया है क्योंकि दी गई समय सीमा बीत चुकी है.’

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित जिला न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वह मजिस्ट्रेट जज से स्पष्टीकरण मांगें और एक महीने के अंदर इस बारे में रिपोर्ट दें. बेंच ने आदेश में कहा, ‘उन्हें (न्यायिक मजिस्ट्रेट को) यह बताना होगा कि क्यों और किन परिस्थितियों में उन्होंने रिपोर्ट दी है कि इस मामले पर उनका अधिकार क्षेत्र खत्म हो गया और वह इस मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं करेंगे.’ सुप्रीम कर्ट ने रजिस्ट्री को अपने आदेश की कॉपी संबंधित अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर के लिए निर्धारित की.



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