‘देश की 65 करोड़ माताओं, बहनों और बेटियों को लगना चाहिए कि…’, CJI की कौन सी बात सुनकर महिला वकीलों ने जोर से बजाईं तालियां?



देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संस्थागत सुधारों पर जोर दिया है. उन्होंने हाईकोर्ट्स के कॉलेजियम को योग्य महिला वकीलों को जजों के तौर पर नियुक्त किए जाने को लेकर गंभीरता से विचार करने को कहा है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व देश की 65 करोड़ माताओं, बहनों और बेटियों के विश्वास से जुड़ा है, जिन्हें यह भरोसा होना चाहिए कि न्याय व्यवस्था उनकी वास्विकताओं को समझती है और उनके साथ निष्पक्षता से पेश आएगी.

रविवार (8 मार्च, 2026) को सीजेआई सूर्यकांत ने इंडियन वीमेन इन लॉ के पहले सम्मेलन में ‘हाफ द नेशन-हाफ द बेंच, ब्रिज द गैप-बैलेंस द बेंच’ टॉपिक पर बोलते हुए यह बात कही है. सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि बार के सदस्यों को एक साधारण सी वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए कि महिला सदस्य रियायतें नहीं मांग रही हैं.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘वे निष्पक्ष और उचित प्रतिनिधित्व की मांग कर रही हैं, जो लंबे समय से लंबित है. जब स्वयं यह पेशा इस सत्य को आत्मसात कर लेगा, तभी न्यायपालिका तक पहुंचने का मार्ग स्पष्ट होगा.’ इस पर वहां मौजूद महिला वकीलों और न्यायपालिका के सदस्यों ने काफी तालियां बजाईं.

जस्टिस सूर्यकांत ने हाईकोर्ट्स के कॉलेजियम से अनुरोध किया कि वे अपने विचार क्षेत्र का विस्तार करें और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहीं अपने-अपने राज्यों की महिला एडवोकेट्स को पदोन्नति के लिए शामिल करें. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि अगर प्रगति को सार्थक बनाना है, तो उसे संस्थागत रूप देना होगा. उन्होंने कहा कि कहानी यह नहीं होनी चाहिए कि किसी एक व्यक्ति को अधिक प्रतिनिधित्व मिला, बल्कि यह होनी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट और देशभर के हाईकोर्ट्स ने समझ-बूझकर निष्पक्षता को अपनी प्रक्रियाओं में समाहित किया.

सीजेआई ने कहा, ‘हम सभी को यह समझना चाहिए कि इस तरह का सुधार कोई आकस्मिक घटना नहीं है; यह एक सतत प्रक्रिया है. संस्थागत निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत कार्यकाल और व्यक्तिगत व्यक्तित्व से परे दृढ़ता की आवश्यकता होती है. यह मेरे कार्यकाल में, या मेरे साथी जजों के कार्यकाल में पूरी तरह से साकार नहीं हो सकता है. हालांकि, यह हमारी प्रतिबद्धता की गहराई को निर्धारित नहीं कर सकता और न ही करना चाहिए.’
 
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुधार का एक क्षेत्र हाईकोर्ट्स के कॉलेजियम के भीतर निहित है और उन्हें यह समझना होगा कि सोच-समझकर कार्रवाई करने का समय भविष्य में नहीं, बल्कि अभी है. इंडियन वीमेन इन लॉ नामक संगठन से जुड़ी सीनियर एडवोकेट्स शोभा गुप्ता और महालक्ष्मी पावनी ने अतिथियों का स्वागत किया. अतिथियों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमण और सुप्रीम कोर्ट के अन्य रिटायर्ड जज शामिल थे. इनके अलावा, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्ल भुइयां भी शामिल थे.



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