देश में हुए एक साथ चुनाव तो बचेंगे 7 लाख करोड़ रुपए…संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष ने समझाया गणित


‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने मंगलवार (19 मई 2026) को कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने पर देश को सात लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है और बचाई गई इस राशि का इस्तेमाल विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है. चौधरी ने गुजरात के मुख्य सचिव को प्रस्ताव के संबंध में सभी विभागों से प्राप्त सुझावों पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर रही जेपीसी ने मंगलवार को गुजरात का तीन दिवसीय दौरा शुरू किया.

पहले दिन, समिति ने गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में नौकरशाहों, मुख्य सचिव एमके दास, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पदाधिकारियों और विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ बैठक की. बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जेपीसी अध्यक्ष और भाजपा सांसद चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला गया, जिन पर पहले विचार नहीं किया गया था. उन्होंने कहा, ‘‘हमने उन्हें एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसे बाद में देश भर की अन्य राज्य सरकारें एक आदर्श के रूप में अपना सकती हैं, ताकि वे अपनी रिपोर्ट उसी प्रारूप में सौंपें.’’ चौधरी ने कहा कि रिपोर्ट में उद्योगों, उत्पादन हानि, श्रम प्रवासन, रोजगार, जीएसटी संग्रह, अर्थव्यवस्था, पर्यटन और शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यापक आकलन होना चाहिए.

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बड़ा दावा

उन्होंने कहा, ‘‘मुख्य सचिव को आगे के विचार-विमर्श और कार्रवाई के लिए एक व्यापक रिपोर्ट पेश करनी चाहिए. आज की चर्चा बेहद सकारात्मक और रचनात्मक रही.’’ चौधरी की अध्यक्षता में 41 सदस्यीय संसदीय समिति एक साथ चुनाव कराने से संबंधित दो प्रस्तावित कानूनों- संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही है. चौधरी ने दावा किया कि अगर एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो देश को सात लाख करोड़ रुपये की बचत होगी और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि होगी. उन्होंने कहा, ‘‘अर्थशास्त्रियों ने भी यही कहा है कि इससे जीडीपी में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है. अगर एक साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो देश सात लाख करोड़ रुपये बचा सकता है. इस राशि का इस्तेमाल बुनियादी ढांचा विकास, गरीबों के कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जन कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है.’’

ये भी पढें- One Nation One Election: वन नेशन वन इलेक्शन पर केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा दावा, पीएम मोदी को लेकर कही ये बात

चुनाव सुधार पर बीजेपी का बड़ा बयान

भाजपा नेता ने चुनाव सुधार प्रक्रिया शुरू करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देते हुए कहा कि केंद्र ने इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए एक समिति का गठन किया था. चौधरी ने कहा कि वह एक साथ चुनाव कराने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि भारत के छह पूर्व प्रधान न्यायाधीशों ने समिति को बताया है कि संघीय संरचना, मूल संरचना या मौलिक अधिकारों के संबंध में किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं होता है. चौधरी ने कहा कि समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है.

एक साथ चुनाव पर बड़ी सिफारिश

उन्होंने कहा, ‘‘समिति ने लगभग 18,000 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है. रिपोर्ट में लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश भी शामिल है.’’ चौधरी ने बताया कि सिफारिशों के अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होने चाहिए, जबकि पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव संसदीय और विधानसभा चुनावों के 100 दिनों के भीतर पूरे हो जाने चाहिए. चौधरी ने कहा, ‘‘इस सुधार से लगातार चुनाव कराने की आवश्यकता नहीं होगी और सरकारों को शासन, विकास, गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समग्र राष्ट्रीय प्रगति के लिए अधिक समय और संसाधन लगाने का अवसर मिलेगा.’’ उन्होंने कहा कि समिति विस्तृत अध्ययन कर रही है और उन्हें विश्वास है कि इसके सदस्य और संसद, दोनों ही दलीय राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में काम करेंगे.

ये भी पढें- One Nation, One Election पर सीएम भूपेश बघेल का बड़ा दावा, कहा- ये सिर्फ शिगुफा, क्या लोकसभा चुनाव भी…?

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’

अहमदाबाद पहुंचने के बाद हवाई अड्डे पर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए चौधरी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा राष्ट्रीय हित में है और इसे कई संस्थाओं और समितियों का समर्थन हासिल है. उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले भारतीय विधि आयोग ने भी कहा है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होने चाहिए.’’ चौधरी ने कहा कि नीति आयोग ने भी अपने लेखों में एक साथ चुनाव कराने की वकालत की है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों वाली संसद की स्थायी समिति ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.

सहमति बनाने राज्यों का दौरा जारी

उन्होंने बताया कि समिति गुजरात पहुंचने से पहले महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक का दौरा कर चुकी है. चौधरी ने कहा, ‘‘हमारा प्रयास सभी की बात सुनना और सभी दृष्टिकोणों को ध्यान में रखना है. जब हम संसद को अपनी सिफारिशें सौंपेंगे, तो हमारा प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी हितधारकों के बीच व्यापक सहमति बनी हो.’’

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *