न सुनवाई, न याचिका खारिज… अदालत ने मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ शिकायत पर कहा- ‘गलत कोर्ट में आया मामला’


कांग्रेस नेता और तेलंगाना AICC प्रभारी मीनाक्षी नटराजन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. एक कानूनी विवाद, जिसने पहले ही राजनीतिक ध्यान खींचा है, तब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया, जब हैदराबाद की एक अदालत ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन और कई अन्य राजनीतिक हस्तियों के नाम वाली याचिका वापस कर दी. इस मामले के खत्म होने की अटकलों के उलट, अदालत ने आरोपों की असलियत की जांच नहीं की और न ही किसी आरोपी को कोई राहत दी. इसके बजाय, अदालत ने फैसला सुनाया कि मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई एक खास स्पेशल कोर्ट में ही होनी चाहिए.

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

यह विवाद कांग्रेस नेता बंदारू श्रीलता के आरोपों से शुरू हुआ, जिन्होंने पार्टी के एक पदाधिकारी पर शारीरिक उत्पीड़न और उनकी सुरक्षा को खतरा पहुंचाने का आरोप लगाया था. इन आरोपों के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और FIR भी हुई. हालांकि, विवाद तब और बढ़ गया जब कई राजनीतिक नेताओं को आरोपी बनाते हुए एक निजी शिकायत दर्ज कराई गई. 

सुनवाई के दौरान, अदालत के सामने मुख्य मुद्दा यह नहीं था कि आरोप सही हैं या गलत. ध्यान अधिकार क्षेत्र से जुड़े कानूनी सवाल पर चला गया. एक आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि शिकायत में चुने हुए प्रतिनिधियों और सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों के नाम शामिल थे, इसलिए मामले की सुनवाई केवल जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों के लिए तय स्पेशल कोर्ट में ही हो सकती है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस बात से सहमति जताई और याचिका वापस कर दी.

मामले पर कानूनी विशेषज्ञ की राय क्या?

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि याचिका वापस करना उसे खारिज करने से बिल्कुल अलग बात है. अदालत का आदेश न तो आरोपों को गलत साबित करता है और न ही शिकायत में नामजद किसी व्यक्ति के बेगुनाह या दोषी होने का फैसला करता है. इसके बजाय यह शिकायतकर्ता के लिए उसी शिकायत के साथ सही न्यायिक मंच पर जाने का रास्ता खुला रखता है.

इस मामले ने इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींचा है, क्योंकि ऐसी खबरें हैं कि याचिका का संबंध चुनाव से जुड़ी जानकारी के खुलासे की जांच से है. सवाल उठाए गए हैं कि क्या लंबित कानूनी कार्यवाही का जिक्र नामांकन दस्तावेजों में किया जाना चाहिए था और चुनाव के कागजात दाखिल करते समय उम्मीदवारों की क्या जिम्मेदारियां होती हैं. नामांकन पत्रों की जांच के दौरान अक्सर ऐसे प्रक्रियात्मक मुद्दे अहम हो जाते हैं. 

यह भी पढे़ंः Meenakshi Natarajan Nomination Rejected: राज्यसभा चुनाव में बड़ा बवाल! कांग्रेस बोली- ‘मीनाक्षी का नामांकन रद्द कर BJP ने चुरा ली सीट’



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *