ईरान युद्ध के बाद दुनिया के कई देशों में तेल और घरेलू गैस (LPG) का संकट पैदा हो गया है. पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक मोर्चे पर जूझ रहा है. मिडिल ईस्ट संकट ने उसकी कमर पूरी तरह तोड़कर रख दी है. जंग शुरू होने से अब तक पाकिस्तान सरकार ने तीसरी बार तरल ईंधन गैस (LPG) की कीमत 34 फीसदी बढ़ाने का फैसला लिया है.
पाकिस्तान में घरेलू गैस की कीमतों में बढ़ोतरी वहां की ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) की ओर से नोटिफाई की गई है, जिसमें बताया गया है कि 11.8 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की कीमत 923.71 रुपये बढ़कर 3,588.59 रुपये हो गई है. इस नोटिफिकेशन में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह भी बताई गई है.
ऊर्जा संकट का सामना कर रहा पड़ोसी मुल्क
घरेलू गैस की कीमतों में इजाफा पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, जहां पहले से ही ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है, वहीं LPG की कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, खासकर निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों पर.
पाकिस्तान अपना 80 से 85 फीसदी क्रूड ऑयल सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है, जिसके टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से होते हुए कराची पहुंचते हैं, लेकिन ईरान ने जबसे होर्मुज पर नाकेबंदी की है, पड़ोसी देश में त्राहिमाम-त्राहिमाम मची हुई है.
पाकिस्तान ने उठाए थे ये कदम
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ही पाकिस्तान डिफेंसिव मोड में आ गया था. यहां तक उसने 50 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया था. ऊर्जा बचाने के लिए दफ्तर अब हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही काम किया जा रहा है. इसके अलावा स्कूलों को बंद रखने को भी कहा गया था, उन्हें ऑनलाइन मोड पर चलाया जा रहा है.
अमेरिका-ईरान के बीच मीडिएटर बना पाकिस्तान
मिडिल ईस्ट की जंग के बाद से पाकिस्तान फड़फड़ा रहा है. इसकी वजह ये भी क्योंकि उसका तेल का भंडार भी धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर है. इतना ही नहीं उसके करीब 45 लाख नागरिक खाड़ी देशों में भी काम करते हैं, जो पाकिस्तान में अरबों रुपये भेजते हैं. पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की भूमिका में है. आने वाले कुछ ही दिनों में अमेरिका और ईरान के डेलीगेशन के बीच इस्लामाबाद में बैठक हो सकती है.