F-35 फाइटर जेट, अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर… अमेरिका ने वेनेजुएला पर इन हथियारों से की एयरस्ट्राइक, इनमें भारत के पास कौन-से?


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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हवाई हमले किए. इस दौरान वेनेजुएला के फुएर्ते तिउना सैन्य अड्डे और ला कार्लोटा एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन हमलों में अमेरिका ने एडवांस्ड फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और मिसाइलों का इस्तेमाल किया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास समेत उत्तरी वेनेजुएला में कई जगहों पर हमले किए. 

अमेरिकी वायु सेना ने मुख्य रूप से F-35 लाइटनिंग II फाइटर जेट का इस्तेमाल किया. ये स्टेल्थ एक छिपने वाला जेट है, जो दुश्मन के रडार से बच सकता है. बता दें कि F-35 के 3 मुख्य वेरिएंट हैं F-35ए (सामान्य), F-35बी (शॉर्ट टेकऑफ/वर्टिकल लैंडिंग) और F-35 सी (कैरियर बेस्ड). ये जेट हमलों में सटीक बमबारी के लिए इस्तेमाल हुआ, जो स्टेल्थ की वजह से वेनेजुएला के एयर डिफेंस से बचता रहा.

अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टर इस्तेमाल किए
वेनेजुएला में कम ऊंचाई पर हमलों के लिए अमेरिका ने बोइंग एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर इस्तेमाल किए. ये अटैक हेलीकॉप्टर हैं, जो ग्राउंड टारगेट पर मिसाइल और गन से हमला करते हैं. ये हेलीकॉप्टर सैन्य अड्डों पर करीब से हमला करने के लिए परफेक्ट माने जाते हैं और रात में भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. 

चिनूक हेलीकॉप्टर का भी हुआ इस्तेमाल
इनके अलावा अमेरिकी सेना द्वारा बोइंग CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर भी इस्तेमाल किए गए हैं. काराकस के आसमान में कम ऊंचाई पर चिनूक उड़ते नजर आए. ये CH-47 चिनूक अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के साथ टूप्स लैंडिंग के लिए आए थे. ये हमले में अपाचे और अन्य हेलीकॉप्टरों के साथ मिलकर काम कर रहे थे. 

भारत के पास कौन-कौन से हेलीकॉप्टर
भारत ने अमेरिका से बोइंग एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, सीएच-47एफ चिनूक ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर और एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलें खरीदी हैं. भारत ने 2015-2020 में अमेरिका से ये हथियार खरीदे, ताकि चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर एक साथ लड़ा जा सके. बता दें कि भारत के पास कुल 22 अपाचे (आर्मी के लिए) और 15 चिनूक (वायुसेना के लिए) हैं.

2019 में भारत ने अपाचे को इंडक्ट किया. 2020 से ये पठानकोट और जोरहाट बेस पर तैनात हैं. लद्दाख में LAC पर चीन को लेकर अपाचे से सेना गश्त करती है. 2025 में हाई-एल्टीट्यूड इलाकों में सप्लाई और रेकी के लिए इनका इस्तेमाल किया गया. उत्तराखंड बाढ़ में इनकी मदद ली गई.

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