‘पाकिस्तान में सेना तैनात कर सकता है चीन, अगर ऐसा हुआ तो…’, बलोच नेता ने एस जयशंकर को चिट्ठी लिख ‘नाPAK’ मंसूबों का कर दिया पर्दाफाश


बलूचिस्तान को आजाद कराने का लड़ाई लड़ रहे बलूच नेता मीर यार बलोच ने नए साल के मौके पर भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर को पत्र लिखा. इस चिट्ठी में उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे, सरकार की तरफ से प्रायोजित आतंकवाद और पिछले 79 सालों में बलूचिस्तान के लोगों पर हुए गंभीर मानवाधिकार से संबंधित अत्याचारों के बारे में बताया. इस लेटर में उन्होंने बलूच में लोगों के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी दी और बताया कि अगले कुछ महीनों में चीन बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है.

मीर बलोच ने 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के तहत उठाए गए साहसी और पक्के इरादों वाले कदमों की सराहना की. 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकी ठिकानों को खत्म कर दिया था. मीर बलोच ने इन कदमों को भारत की जबरदस्त हिम्मत, क्षेत्रीय सुरक्षा और इंसाफ के लिए पक्के इरादे का सबूत बताया. 

 बलूच नेता ने भारत-बलूचिस्तान की संस्कृति का किया जिक्र

लेटर में उन्होंने लिखा, ‘बलूचिस्तान रिपब्लिक के छह करोड़ देशभक्त नागरिकों की तरफ से, हम भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी जाने-माने लोगों को नए साल 2026 की दिल से बधाई देते हैं. यह मौका उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, कमर्शियल, अर्थव्यवस्था, राजनयिक, सुरक्षा और कई तरह के रिश्तों पर सोचने और जश्न मनाने का मौका देता है, जिन्होंने सदियों से भारत और बलूचिस्तान को जोड़ा है.’

‘CPEC उसके आखिरी चरण में पहुंचा’

मीर बलोच ने लेटर में आगे कहा, ‘इन पक्के रिश्तों का उदाहरण हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसी पवित्र जगहें हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक रिश्तों का हमेशा रहने वाला प्रतीक हैं.’ मीर यार बलोच ने कहा कि बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को बहुत खतरनाक मानते हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को उसके आखिरी चरण में पहुंचा दिया है.

‘बलूचिस्तान में सेना तैनात कर सकता है चीन’

बलोच नेता ने कहा, ‘अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्र फोर्स की क्षमता को और मजबूत नहीं किया गया और अगर उन्हें पुराने पैटर्न की तरह नजरअंदाज किया जाता रहा तो यह सोचा जा सकता है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपने सैन्य बल तैनात कर सकता है. 60 मिलियन बलूच लोगों की मर्जी के बिना बलूचिस्तान की जमीन पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक ऐसा खतरा और चुनौती होगी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती.’



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