बगावती सुर-अंतर्कलह से इस्तीफे तक…’अपने’ ही बढ़ा रहे कांग्रेस की टेंशन! चुनावी राज्यों में मचा घमासान


असम-पश्चिम बंगाल से लेकर केरल और तमिलनाडु तक, चार राज्यों में चुनावी बिगुल बजने में अब ज्यादा समय बाकी नहीं है, लेकिन इलेक्शन वाले राज्यों में चुनाव से पहले ही कांग्रेस के सामने विरोधियों से दो-दो हाथ करने के अलावा ‘अपनों’ का साथ बनाए रखने की बड़ी चुनौती है, उनके अपने ही नेता बगावत और विरोध के सुर अख्तियार करते नजर आ रहे हैं. असम में पार्टी अध्यक्ष ने इस्तीफा देकर हलचल मचा दी तो मणिशंकर अय्यर के बयान पर खूब हो-हल्ला मचा है.

असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की नाराजगी

असम में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार (16 फरवरी) को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजे इस्तीफे में उन्होंने पार्टी लीडरशिप पर नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को भेजे इस्तीफे में नाराजगी जताते हुए कहा कि आलाकमान संगठन से जुड़े मामलों में समय से और अहम फैसले लेने में नाकाम रहा है. हालांकि बाद में उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया. लेकिन उनके इस्तीफे से अंदरूनी कलह जरूर उजागर हुई.

मणिशंकर अय्यर का निशाना

कांग्रेस के दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर ने अपनी ही पार्टी के नेता पर करारा निशाना साधा.अय्यर ने एक इंटरव्यू के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को ‘कठपुतली’ (puppet) बता दिया. यही नहीं तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘एंटी-पाकिस्तान’ बता दिया और ‘अगले विदेश मंत्री’ बनने की महत्वाकांक्षा रखने की बात डाली. अय्यर का बयान दिखाता है कि कांग्रेस के भीतरखाने बड़े नेताओं में भी मतभेद हैं. हालांकि पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट कहा कि “मणि शंकर अय्यर का पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है. वे विशुद्ध रूप से अपनी व्यक्तिगत क्षमता से बोलते और लिखते हैं.”

इंडिया गठबंधन के पीएम फेस पर बारू का बयान

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने द टेलीग्राफ में प्रकाशित एक लेख में बारू ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल में अकेले चुनावी मैदान में ताल ठोक सकती है. 

इसके अलावा तमिलनाडु में पावर शेयरिंग को लेकर सियासत गर्म है. पार्टी सांसद मणिकम टैगोर ने  सहयोगी डीएमके के साथ सत्ता की साझेदारी को लेकर बयान देकर बखेड़ा खड़ा किया था. हालांकि, बाद में तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के चीफ के. सेल्वापेरुन्थागाई ने पार्टी सांसद के बयान की आलोचना की थी और कहा कि 
कोई भी AICC नेताओं से बड़ा नहीं है. साथ ही सार्वजनिक मंचों पर गठबंधन पर चर्चा न करने के निर्देश दिए.



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