बांग्लादेश के PM तारिक रहमान का बड़ा फैसला, भारत नहीं पहले विदेश दौरे पर जाएंगे चीन, क्यों किया ऐसा?


बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मलेशिया और चीन को चुना है. इस फैसले को उनकी नई विदेश नीति की प्राथमिकताओं के रूप में देखा जा रहा है. खास बात यह है कि उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को नहीं चुना, जबकि परंपरागत रूप से बांग्लादेशी प्रधानमंत्री अपने विदेश दौरों की शुरुआत भारत से करते हैं.

तारिक रहमान रविवार (21 जून 2026) से अपनी यात्रा शुरू करेंगे. सबसे पहले वह 2 दिनों के लिए मलेशिया जाएंगे. इस यात्रा में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग, सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री और बांग्लादेशी मजदूरों के लिए नए रोजगार अवसरों पर चर्चा की जाएगी. उसके बाद चार दिनों की यात्रा पर वह चीन जाएंगे. वहां वह समर दावोस कहे जाने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की न्यू चैंपियंस एनुअल मीटिंग में हिस्सा लेंगे. इस दौरान उनकी मुलाकात शी जिनपिंग और ली कियांग से भी होने की संभावना है.

बांग्लादेश के विदेश सचिव ने क्या बताया?

बांग्लादेश के विदेश सचिव असद आलम सियाम ने बताया कि चीन यात्रा के दौरान 13 एमओयू, एक वर्क प्रोजेक्ट समेत कुल 17 द्विपक्षीय दस्तावेजों पर साइन हो सकते हैं. इन समझौतों में तीस्ता नदी प्रोजेक्ट भी शामिल है. इस प्रोजेक्ट के तहत ड्रेजिंग और तटबंध निर्माण पर चर्चा होगी. इसके अलावा मोंगला बंदरगाह के आधुनिकीकरण को लेकर भी बातचीत होगी. बांग्लादेश सरकार इस यात्रा को आर्थिक साझेदारी मजबूत करने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में बड़ी पहल मान रही है.

ये भी पढ़ें: जर्मनी के म्युनिख में दो कार्गो ट्रेन टकराए, दो डिब्बे पलटकर सड़क पर गिरे, एक की मौत

तीस्ता प्रोजेक्ट पर भारत की नजर खास

भारत की नजर खास तौर पर तीस्ता प्रोजेक्ट पर बनी हुई है. तीस्ता 54 सीमा पार नदियों में से एक है, जिस पर भारत और बांग्लादेश अभी तक अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं. नई दिल्ली की चिंता इस बात को लेकर है कि चीन की पहुंच बांग्लादेश के उन इलाकों तक बढ़ सकती है जो सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के करीब हैं. यह इलाका भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने चटगांव में चीन के आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र के लिए 340 मिलियन डॉलर की इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. यह प्रोजेक्ट रियायती चीनी लोन से किया  गया है. 

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में सुधार

हालांकि प्रधानमंत्री रहमान की चुनावी जीत के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कुछ सुधार देखा गया है, लेकिन दोनों देशों के संबंधों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में मौजूदगी अभी भी विवाद का विषय बनी हुई है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल और असम में सीमा पार अवैध प्रवासियों को लेकर चल रही कार्रवाई ने भी दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाला है. ऐसे में रहमान की मलेशिया और चीन यात्रा को दक्षिण एशिया की राजनीति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.

ये भी पढ़ें: 21 जून को ईरान- US के बीच स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में बातचीत, कतर- पाकिस्तान करेंगे मध्यस्थता



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *