बांग्लादेश में चुनाव से पहले बवाल, आवामी लीग को बाहर रखने पर यूनुस सरकार घिरी, शेख हसीना के बेटे ने लगाया ये आरोप


फरवरी 2026 में प्रस्तावित आम चुनाव से पहले बांग्लादेश की राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल मच गई है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे और आवामी लीग के प्रमुख रणनीतिकार सजीब वाजेद ने अंतरिम सरकार और मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस पर लोकतंत्र को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी को चुनाव से बाहर करना सुधार नहीं, बल्कि सोच-समझकर की गई राजनीतिक साजिश है.

आवामी लीग को चुनाव से बाहर रखने पर तीखा विरोध
सजीब वाजेद ने कहा कि आवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. उनका आरोप है कि अंतरिम सरकार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने से डर रही है, इसलिए जानबूझकर एक मजबूत राजनीतिक दल को मैदान से बाहर किया जा रहा है.

अंतरिम सरकार का साफ रुख
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव में आवामी लीग हिस्सा नहीं ले सकेगी. सरकार का कहना है कि पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा हुआ है और उसका पंजीकरण निलंबित किया जा चुका है. मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफिकुल आलम ने ढाका में पत्रकारों से कहा कि सरकार की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है और प्रतिबंध हटाने पर किसी तरह का विचार नहीं किया जा रहा.

बहुसंख्यक मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे: सजीब
सजीब वाजेद का कहना है कि आवामी लीग कोई छोटी पार्टी नहीं है, बल्कि इसे देश के करीब 40 से 60 फीसदी मतदाताओं का समर्थन हासिल है. ऐसे में पार्टी को चुनाव से बाहर रखने का मतलब है कि करोड़ों लोगों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि फरवरी 2026 का चुनाव लोकतंत्र की बहाली नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से इनकार होगा.

कैसे यहां तक पहुंचा मामला, जानिए पूरा घटनाक्रम
साल 2024 में छात्र आंदोलन और राजनीतिक अस्थिरता के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी. इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी. मई 2025 में सरकार ने एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत आवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके साथ ही चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण भी निलंबित कर दिया. सरकार का दावा है कि 2024 के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के लिए आवामी लीग जिम्मेदार है, जबकि सजीब वाजेद इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं.

यूनुस सरकार पर सजीब के गंभीर आरोप
सजीब वाजेद ने अंतरिम सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि यूनुस सरकार निष्पक्ष चुनाव से डर रही है, सबसे बड़ी पार्टी को बाहर कर आधी आबादी के मताधिकार छीने जा रहे हैं और राजनीतिक समर्थन के आधार पर सजा दी जा रही है. उनका कहना है कि जिस चुनाव में बहुसंख्यक मतदाताओं को शामिल ही नहीं किया जाए, वह लोकतांत्रिक नहीं हो सकता.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों बढ़ी चिंता
इस पूरे मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय चिंता भी सामने आने लगी है. अमेरिका के पांच सांसदों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए पत्र लिखा है और कहा है कि किसी पूरी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होते हैं. हालांकि अंतरिम सरकार का दावा है कि उसे इस पत्र की जानकारी नहीं है और प्रतिबंध पूरी तरह कानून के तहत लगाया गया है.

चुनाव की वैधता पर उठ रहे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आवामी लीग पर लगा प्रतिबंध चुनाव से पहले नहीं हटाया गया, तो अगली सरकार की वैधता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, बिना आवामी लीग के चुनाव समावेशी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि पार्टी ने लगातार कई चुनाव जीते हैं और उसकी जमीनी पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है.



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