महंगा पड़ा पहलगाम में आतंकी हमला करना, बूंद-बूंद को तरस रहा पाकिस्तान, कराची में पानी की भारी कमी


पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची में पानी की भारी कमी है. भीषण गर्मी के बीच लगभग 70 प्रतिशत आबादी पानी की आपूर्ति में लगातार रुकावट से परेशान है. यह जल संकट ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि एक वर्ष से अधिक समय से निलंबित है, जिससे पाकिस्तान में पानी की कमी हो गई है. 

क्या है सिंधु जल संधि?

1960 में हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को कंट्रोल करती है. इस संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों पर असीमित अधिकार प्राप्त हुए, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब पर प्राथमिक अधिकार दिए गए.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की. हालांकि यह संकट नया नहीं है. एशिया न्यूज़ नेटवर्क की एक रिपोर्ट के अनुसार, कराची में पानी की कमी दशकों से जनसंख्या वृद्धि, पुरानी पाइपलाइनों, खराब शहरी नियोजन और पानी चोरी के चलते पैदा हुई है.

कराची के कई इलाकों में पानी की कमी

एआरवाई न्यूज़ के अनुसार, शहर के कई हिस्सों में रहने वाले लोगों को पानी की कमी के चलते महंगे निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. गुलिस्तान-ए-जौहर, गुलशन-ए-इकबाल, अजीजाबाद, लियाकतबाद, उत्तरी नाज़िमाबाद और उत्तरी कराची सहित कई इलाकों में 2 सप्ताह से अधिक समय से पानी की भारी कमी देखी जा रही है.

जमात-ए-इस्लामी ने सरकार पर साधा निशाना

इस मुद्दे ने राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है. जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफ़िज़ नईम-उर रहमान ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली सिंध सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रांत में लगभग 2 दशकों से सत्ता में होने के बावजूद वह कराची में पानी की गंभीर कमी को दूर करने में विफल रही है.

बकरीद के उत्सव के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए रहमान ने कहा कि हजारों निवासी बुनियादी ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने पीपीपी के नेतृत्व वाली सिंध सरकार पर आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने में विफल रहने का आरोप लगाया और सवाल उठाया कि प्रांत में पार्टी के 18 साल के शासन के बावजूद कराची की पानी की समस्या अनसुलझी बनी हुई है.

नईम ने सिंध ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बोर्ड पर भी जमकर निशाना साधा और दावा किया कि भारी बजट मिलने के बावजूद प्राधिकरण उचित स्वच्छता और कुर्बानी के जानवरों के अपशिष्ट के निपटान को सुनिश्चित करने में विफल रहा है.

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