राजस्थान की जोजरी नदी के प्रदूषण पर SC ने लिया संज्ञान, कहा- ‘औद्योगिक कचरे ने पानी को बना दिया जहर’


राजस्थान की जोजरी नदी में हो रहे प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि औद्योगिक कचरे से नदी में हुए प्रदूषण का असर सैकड़ों गांवों पर पड़ा है. जजों ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह मामले को चीफ जस्टिस के सामने रखें ताकि वह सुनवाई के लिए बेंच का गठन कर सकें.

जोजरी नदी राजस्थान में बहने वाली एक मौसमी नदी है. इसकी कुल लंबाई लगभग 83 किलोमीटर है. राजस्थान के नागौर जिले में पूंडलू गांव के पास की पहाड़ियों से निकलने वाली यह नदी जोधपुर जिले में खेजड़ला खुर्द के पास लूनी नदी में मिल जाती है. यह नदी गंभीर रूप से प्रदूषित है, जिसका मुख्य कारण आस-पास के कारखानों से निकलने वाला कचरा है.

नदी में बह रहे जहरीले रसायन और भारी धातुएं

नदी के किनारे बड़ी संख्या में कपड़ा उद्योग और टाइल्स निर्माण उद्योग की फैक्ट्रियां हैं. इनसे निकलने वाला औद्योगिक कचरा बिना सफाई के नदी में डाला जा रहा है. साथ ही घरेलू सीवेज का पानी भी बिना ट्रीटमेंट नदी में जा रहा है. इससे पानी में सल्फर, लेड और कैडमियम जैसे जहरीले रसायन और भारी धातुएं मिली गई हैं. यह इंसानों और जानवरों दोनों के लिए पीने लायक नहीं है.

नदी के प्रदूषित होने से पर्यावरण पर पड़ा रहा असर

जहरीले हो चुके जोजरी नदी के पानी ने पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव डाला है. इसने कृषि योग्य भूमि को बंजर बना दिया है. स्थानीय लोगों को इसके चलते कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं. प्रदूषण का असर वन्यजीवों पर भी पड़ा है.

राज्य सरकार नदी की स्थिति सुधारने का कर रही दावा

राज्य सरकार पिछले काफी समय से नदी की स्थिति सुधारने के प्रयासों का दावा कर रही है. उसने इसके लिए बजट आवंटित करने की बात कही है. यह भी कहा है नदी के किनारे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन जोजरी नदी अब भी बदहाल स्थिति में है.

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