शुभेंदु अधिकारी का वादा या दवाब? वोटिंग से पहले TMC के जहांगीर ने क्यों किया चुनाव लड़ने से इनकार


टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी को उस वक्त झटका लगा, जब उनकी पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान ने फाल्टा विधानसभा सीट पर मतदान से पहले अपना नाम वापस ले लिया. पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान के लिए 21 मई को वोटिंग होनी है. उनके इस कदम से बीजेपी को फाल्टा में एकतरफा जीत मिलने की संभावना है. टीएमसी ने जहांगीर खान के फैसले से दूरी बनाते हुए इसे उनका निजी फैसला करार दिया और आरोप लगाया कि चुनाव के बाद फाल्टा में भय का माहौल है.

जहांगीर ने किया CM शुभेंदु के वादे का जिक्र

जहांगीर खान ने कहा कि उन्होंने फाल्टा के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्षेत्र के विकास के लिए विशेष पैकेज देने का वादा किया है, जिसके चलते वह यह निर्णय लेने को प्रेरित हुए. उन्होंने कहा, ‘मैं फाल्टा का बेटा हूं और मैं चाहता हूं कि यह क्षेत्र शांतिपूर्ण रहे तथा इसका विकास हो. मुख्यमंत्री ने फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की है, इसीलिए मैंने इस विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का निर्णय लिया है.’

फाल्टा में डर का माहौल: टीएमसी

तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि फाल्टा क्षेत्र में फिर से होने वाले चुनाव से पीछे हटना जहांगीर खान का निजी फैसला है, न कि पार्टी का. टीएमसी ने आरोप लगाया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद फाल्टा में डर का माहौल है. पार्टी ने आरोप लगाया, ‘फाल्टा में तृणमूल कांग्रेस के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है और पार्टी के कई कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई है, उन्हें बंद कर दिया गया है या उन पर जबरन कब्जा कर लिया गया है. बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद चुनाव आयोग आंखें मूंद रहा है.’

कुछ लोग दवाब के आगे झुक गए: टीएमसी

टीएमसी की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘इतने दबाव के बावजूद, हमारे कार्यकर्ता अडिग हैं और बीजेपी के साथ-साथ एजेंसियों और प्रशासन के माध्यम से दी जा रही धमकियों का लगातार विरोध कर रहे हैं. हालांकि, कुछ अंततः दबाव के आगे झुक गए.’

शुभेंदु ने फाल्टा में प्रचार अभियान के दौरानल जहांगीर खान पर निशाना साधते हुए कहा, ‘खुद को पुष्पा कहने वाले कहां हैं? उनके पास कोई और रास्ता नहीं था, क्योंकि उन्हें कोई मतदान एजेंट नहीं मिला, इसलिए उन्होंने चुनाव मैदान से भागने का फैसला किया.’ फाल्टा में 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कुछ बूथ पर ईवीएम पर इत्र, स्याही और चिपकने वाली टेप का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बाद वहां पुनर्मतदान का आदेश दिया गया था.

ये भी पढ़ें : गले में माला, कंधे पर बिठाकर स्वागत और विजय जुलूस… जमानत के बाद ऐसे किया रेप के आरोपी का स्वागत



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *