- एक समुदाय की परंपरा दूसरे पर थोपना गलत कहा।
पश्चिम बंगाल के मदरसों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को अनिवार्य रूप से गाया जाना बनाने पर काफी ज्यादा बवाल मचा हुआ है. इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस सरकारी फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. बोर्ड ने पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सभी पांच छंदों का पाठ अनिवार्य करने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह लोगों की धार्मिक पहचान और संवैधानिक आजादी का उल्लंघन है.
पर्सनल लॉ बोर्ड ने की सरकारी फैसले की वापसी की मांग
पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मंगलवार (2 जून, 2026) को पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार की ओर से जारी किए गए आदेश के विरोध में एक आधिकारिक बयान जारी किया. जिसमें बोर्ड ने पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी की भाजपा सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है.
AIMPLB के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने आधिकारिक बयान देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार को इस फैसले से जुड़ी अधिसूचना को वापस लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार का यह निर्देश बिजॉय इमैनुएल बनाम केरल राज्य के मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के विपरीत है, जिसमें शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी भी नागरिक को राष्ट्रीय या धार्मिक समारोह में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है.
एक समुदाय की परंपरा को दूसरे पर थोपना गलतः इलियास
इलियास ने आगे कहा, ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह स्पष्ट करना जरूरी समझता है कि वंदे मातरम के कुछ छंदों में ऐसी अवधारणाएं हैं, जिन्हें मुसलमान एकेश्वरवाद (तौहीद) के इस्लामी सिद्धांत के साथ असंगत मानते हैं. इसलिए मुस्लिम छात्रों को गाना सुनाने के लिए मजबूर करना उनकी धार्मिक पहचान और संवैधानिक आजादी पर सीधा उल्लंघन है.’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एक धर्मनिरपेक्ष देश को एक समुदाय की धार्मिक या सांस्कृतिक परंपराओं को दूसरे पर नहीं थोपना चाहिए.
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