जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची साने 1 जुलाई से 3 जुलाई तक भारत की यात्रा पर रहेंगी. 1 जुलाई की शाम जापान की प्रधानमंत्री साने दिल्ली पहुँचेंगी. इस दौरान ताकाइची साने का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय मुलाकात होगी. भारत-जापान व्यापार मंच के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी.
सत्ता संभालने के बाद जापानी पीएम की पहली भारत यात्रा
जापान में सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री ताकाइची साने की यह पहली भारत यात्रा है. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री साने के बीच बीते कुछ महीनों में कई बार बातचीत और मुलाकात भी हो चुकी है. हाल ही में फ्रांस के एविएन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के साइडलाइन में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी.
वहीं नवंबर, 2025 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के मौक़े पर भी दोनों के बीच मीटिंग हुई थी.
क्यों अहम है जापान की पीएम की यह यात्रा
जापान की प्रधानमंत्री की भारत यात्रा चर्चा में है. दरअसल यह यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने वाला होगा. भारत और जापान के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा होगी और व्यापार, निवेश, आर्थिक सुरक्षा, रक्षा एवं सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और संस्कृति से जुड़े आपसी हित के मुद्दे पर दोनों नेता गहन चर्चा करेंगे. भारत और जापान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक निकटता वाले संबंध हैं.
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प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री साने की मुलाकात में मुक्त एवं खुले हिंद प्रशांत के मुद्दे पर बातचीत करेंगे. यह बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा भी माना जाता है. वैसे भी भारत और जापान दोनों ही क्वाड के सदस्य हैं. FOIP यानि Free and Open Indo-Pacific की परिकल्पना में दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा जाता है.
आपको बता दें कि फरवरी, 2026 में शिलांग में आयोजित किजुना कॉन्कलेव में जापान के विदेश राज्य मंत्री इवाओ हारी ने कहा था कि ‘नॉर्थ ईस्ट भारत का वो क्षेत्र है, जहां प्रधानमंत्री मोदी की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की फ्री एंड ओपन इंडो पैसिफिक की परिकल्पना साकार होता है’.
2027 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध के 76 साल होंगे पूरे
साल 2027 में भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होंगे, जो कि भारत और जापान की दोस्ती के एक मजबूत स्तंभ के तौर पर देखा जाएगा. दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद लगातार बना रहा है. अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की यात्रा की थी. जनवरी, 2026 में जापान के विदेश मंत्री भारत दौरे पर आए थे.
अप्रैल, 2026 में प्रधानमंत्री ताकाइची साने की अध्यक्षता में आयोजित AZEC Plus की बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने हिस्सा लिया था. इस बैठक में पश्चिम एशिया में ताज़ा हालात के कारण ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति में आने वाली बाधाओं पर चर्चा हुई थी. इतना ही नहीं भारत के पेट्रोलियम मंत्री ने नवंबर, 2025 में जापान की यात्रा भी की थी.
भारत के नॉर्थ ईस्ट के साथ जापान की सहभागिता भी बीते कई सालों में लगातार बढ़ी है. जनवरी, 2026 में भारत-जापान विदेश मंत्रियों की बैठक में नॉर्थ ईस्ट भारत और आसपास के क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने पर चर्चा हुई थी. भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम के माध्यम से दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई थी. इसी के चलते जापान के नेताओं ने भारत के नॉर्थ ईस्ट का खूब दौरा किया.
जापान के नेताओं ने कब कब नॉर्थ ईस्ट का दौरा किया?
मई, 2025- जापान की प्रतिनिधि सभा के तत्कालीन अध्यक्ष फुकुशिरो नुकागा ने असम का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने असम के मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मुलाकात की. IIT गुवाहाटी और टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्ट सुविधा का भी दौरा किया.
दिसबंर, 2025- जापान के कागावा प्रांत के उप राज्यपाल ओयामा सातोशी ने नेतृत्व में एक डेलीगेशन ने दिल्ली और मणिपुर का दौरा किया.
फरवरी, 2026- जापान के विदेश राज्य मंत्री इवाओ होरी ने मेघालय और असम का दौरा किया. होरी ने दोनों ही राज्यों के सीएम से मुलाकात की. भारत-जापान बौद्धिक सम्मेलन को संबोधित किया. होरी ने भी IIT गुवाहाटी का भ्रमण किया.
भारत के उत्तर पूर्व राज्यों के किन नेताओं ने जापान का दौरा किया?
- जनवरी, 2025- असम के मुख्यमंत्री ने जापान का दौरा किया. इस दौरान असम सरकार और ASEAN ONE के बीच 5 सालों में 20 हज़ार युवाओं को प्रशिक्षण देने पर MoU हुआ.
- जुलाई, 2025- नागालैंड के मुख्यमंत्री ने जापान की यात्रा की.
- अक्टूबर, 2025- अरूणाचल प्रदेश के सीएम ने जापान का दौरा किया. अरूणाचल के सीएम ससाकावा पीस फाउंडेशन का भ्रमण भी किया.
भारत और जापान ने नॉर्थ ईस्ट के विकास एवं सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई विशेष मंच भी स्थापित किए हैं, इनमें शामिल हैं:
1. भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम
2. भारत-जापान बौद्धिक सम्मेलन
3. मानव संसाधन सहयोग
4. आर्थिक सहयोग
5. आधिकारिक विकास सहायता (ODA)
6. कनेक्टिविटी
7. सांस्कृतिक सहयोग
कुल मिलाकर भारत और जापान के बीच सालों पुरानी दोस्ती को और मजबूत करने वाला दौरा होगा.
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