सब कुछ याद रखेगा ईरान, जख्मों को भूलेगा नहीं, अमेरिका को दिया सीधा मैसेज- ‘शांति समझौता टूटा तो…’


Iran US Deal: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर ईरान ने बड़ा बयान दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ कहा है कि समझौते के किसी भी उल्लंघन के लिए अमेरिका जिम्मेदार होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका पर यह जिम्मेदारी है कि वह मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह निभाए.

क्षेत्रीय सहयोगियों की कार्रवाई की भी होगी जिम्मेदारी

इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका केवल अपने कदमों के लिए ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में मौजूद अपने सहयोगियों और अन्य पक्षों द्वारा समझौते के उल्लंघन की स्थिति में भी जिम्मेदार माना जाएगा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी पक्ष पर यह दायित्व है कि वह समझौते का सम्मान सुनिश्चित करे.

समझौता होने का मतलब अपराधों को भूलना नहीं

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग तक पहुंचने का यह मतलब नहीं है कि अतीत की घटनाओं और अपराधों को माफ कर दिया गया है या उन्हें भुला दिया गया है. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा.

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पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार हुआ प्रारंभिक समझौता

जानकारी के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तैयार हुआ प्रारंभिक समझौता मुख्य रूप से पाकिस्तान की मध्यस्थता से संभव हुआ है. पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक इस समझौते की शुरुआत दो अहम कदमों से होगी. पहले चरण में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाए गए अपने प्रतिबंध हटाएगा और इसके साथ ही अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लागू अपनी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करेगा.

60 दिन की वार्ता का प्रस्ताव

इसके बाद दोनों देश अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुद्दों पर विस्तृत बातचीत करेंगे. हालांकि समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है और इसकी शर्तों को गोपनीय रखा गया है.

इजरायल समझौते का हिस्सा नहीं

इस बीच इजरायल ने संकेत दिया है कि वह लेबनान में अपने सैन्य अभियानों को नहीं रोकेगा. इजरायल के रक्षा मंत्री ने सोमवार को कहा कि देश लेबनान में अपने कब्जे वाले इलाकों से पीछे नहीं हटेगा. गौरतलब है कि इजरायल ने 28 फरवरी को अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, लेकिन वह इस नए समझौते का हिस्सा नहीं है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे का जवाब देना जारी रखेगा.

लेबनान मुद्दा बन सकता है बड़ी बाधा

ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि युद्ध समाप्त करने वाले किसी भी समझौते में लेबनान में जारी संघर्ष को समाप्त करना भी शामिल होना चाहिए. ऐसे में इजरायल का रुख इस समझौते के सामने नई चुनौती खड़ी कर सकता है.

हिज्बुल्लाह, हूती और इराकी समूहों से संबंध बरकरार

रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के अपने सहयोगी संगठनों जैसे लेबनान के हिज्बुल्लाह, यमन के हूती विद्रोहियों और इराक की शिया मिलिशिया के साथ संबंध पहले की तरह मजबूत बने हुए हैं. अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि प्रस्तावित समझौते में इन संगठनों को मिलने वाले ईरानी समर्थन को लेकर कोई विशेष प्रावधान शामिल किया गया हो. हालांकि अंतिम दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.

विदेश मंत्री बोले- अमेरिका पर भरोसा नहीं, लेकिन बातचीत जारी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी सोमवार को कहा कि ईरान अमेरिका के साथ समझ विकसित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है. ईरानी सरकारी टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि अमेरिका द्वारा पहले किए गए समझौतों को तोड़ने और प्रतिबद्धताओं को पूरा न करने की घटनाएं आज भी ईरान की याद में ताजा हैं.

‘पुराने अनुभवों को देखते हुए आगे बढ़ रहे हैं’

अराघची ने कहा, “अमेरिका द्वारा अपने वादे तोड़ने और समझौतों का पालन न करने की घटनाएं हमारे दिमाग में हैं. इसी कारण हम मौजूदा समझ और आगे की बातचीत को पूरी सावधानी और अविश्वास के आधार पर आगे बढ़ा रहे हैं.” उन्होंने कहा कि इसके बावजूद ईरान देश के लिए अधिक से अधिक आर्थिक अवसर पैदा करने की कोशिश कर रहा है और विदेश मंत्रालय कोई भी अवसर गंवाना नहीं चाहता, लेकिन किसी अवसर पर पूरी तरह निर्भर भी नहीं रहेगा.



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