हमास को दुश्मन न समझने वाला पाकिस्तान गाजा में क्यों उतार रहा अपनी सेना, मुनीर का क्या है प्लान?


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अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन के तहत पाकिस्तान गाजा में सेना भेजने को तैयार हो गया है. पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने शनिवार (29 नवंबर) को कहा कि उनका देश गाजा में सुरक्षा बलों को तैनात करने के लिए तैयार है, लेकिन हमारे सैनिक फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास को निरस्त्र करने में भाग नहीं लेंगे.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री का ये बयान अमेरिका के गाजा शांति समझौते पर चर्चा तेज होने के बीच आया है, जिसमें मुस्लिम बहुल देशों के सैनिकों से बने अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) की स्थापना का प्रावधान है. इशाक डार ने बताया कि गाजा में सेना भेजने का फैसला प्रधानमंत्री ने फील्ड मार्शल से परामर्श के बाद लिया है.

इशाक डार ने क्या कहा
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्पष्ट रूप से परिभाषित आदेश के तहत ही सेना भेजेगा और पाकिस्तानी सेना हमास को निरस्त्र करने में कोई भूमिका नहीं निभाएगी.’ डार ने जोर देकर कहा कि हमास को निरस्त्र करने का मुद्दा पहले रियाद में दो-राज्य समाधान पर हुई बातचीत के दौरान उठा था. पाकिस्तान इस तरह के किसी भी प्रयास में भाग नहीं लेगा. हम इसके लिए तैयार नहीं हैं. ये हमारा काम नहीं है. हमारा रोल शांति स्थापना का है. 

इंडोनेशिया ने 20,000 सैनिकों की पेशकश की 
डार ने कहा कि पाकिस्तान का काम शांति सुनिश्चित करना है. हम अपनी सेनाएं भेजने को तैयार हैं, लेकिन गाजा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल का आदेश स्पष्ट रूप से निर्धारित होना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान की भागीदारी पर सहमति दे दी है, लेकिन ये ISF के जनादेश और कार्य क्षेत्र के स्पष्ट होने पर निर्भर करेगा. इंडोनेशिया ने इस मिशन के लिए 20,000 सैनिकों की पेशकश की है. 

UNSC ने ISF की तैनाती को दी मंजूरी
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने पिछले हफ्ते गाजा संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए एक अमेरिकी प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसमें ISF की तैनाती को भी अधिकार दिया गया था. पाकिस्तान समेत 13 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जबकि रूस और चीन ने मतदान से दूरी बनाए रखी. वहीं, दूसरी ओर हमास ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और प्रस्तावित ISF की कड़ी निंदा की. 

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