होर्मुज में जहाजों को एस्कॉर्ट करेगा अमेरिका? ट्रंप कब करेंगे ऐलान, 7 देशों संग बन रहे प्लान


Strait of Hormuz:  अमेरिका जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की घोषणा कर सकता है. दुनिया के प्रमुख देशों के सहयोग से बनने वाले इस गठबंधन का मकसद व्यापारिक जहाजों को समुद्री खतरे और बढ़ते तनाव से सुरक्षित रखना है. यह कदम उस समय उठाया जा रहा है जब मध्यपूर्व में संघर्ष तेज हो रहा है और जलसंधि में आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और ईंधन की कीमतों पर असर पड़ा है.

वाल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक,  व्हाइट हाउस ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के हालात इस घोषणा के समय को प्रभावित कर सकते हैं. अमेरिका के करीबी सहयोगियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है. ट्रंप ने देशों से कहा कि वे युद्धपोत भेजें ताकि कंटेनर जहाज  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित होकर गुजर सकें. यह  जलमार्ग मार्च के पहले सप्ताह से लगभग बंद पड़ा है. यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है. जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही रुकने से दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं.

ट्रंप की अपील और देशों की प्रतिक्रिया

चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन को ट्रंप ने विशेष रूप से अपने आह्वान में शामिल किया. अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि वे इन देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि चीन इस मामले में “सकारात्मक सहयोगी” बनेगा और जलसंधि खोलने में मदद करेगा. हालांकि किसी भी देश ने सार्वजनिक तौर पर ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है.

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ट्रंप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की अहमियत पर चर्चा की और अपने कनाडाई समकक्ष मार्क कैरी से भी अलग बातचीत की. चीन के अमेरिकी दूतावास ने कहा कि सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और बिना रुकावट के हो. बीजिंग संबंधित पक्षों के साथ संवाद बढ़ाएगा.

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे ट्रंप की अपील को ध्यान में रखेंगे और स्थिति को सावधानीपूर्वक देखेंगे तथा वॉशिंगटन के साथ समन्वय करेंगे. जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची इस हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिलने वाले हैं और उम्मीद है कि वे सीधे इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि वे यूरोप, भारत और एशिया के देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मिशन पर काम कर रहे हैं, लेकिन मिशन तभी शुरू होगा जब परिस्थितियां अनुकूल हों. जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने कहा, “क्या हम जल्द ही इस संघर्ष का हिस्सा बनेंगे? नहीं.” इससे यह साफ होता है कि जर्मनी मिशन में शामिल होने के लिए अनिच्छुक है.

 स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ा खतरा

ईरान ने व्यापारिक जहाजों को चेतावनी दी है कि वे  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार न करें, जिससे इस क्षेत्र में समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है. पिछले हफ्ते, ईरानी बलों द्वारा कथित रूप से भेजे गए विस्फोटक से भरे नावों ने इराकी जलक्षेत्र में दो ईंधन टैंकरों पर हमला किया. इनसे आग लग गई और एक भारतीय नागरिक सहित एक चालक दल सदस्य की मौत हो गई.



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