मंदिर के दीप स्तंभ में दीया जलाना तमिलनाडु सरकार को मंजूर नहीं, HC की कड़ी फटकार के बाद अब SC का दरवाजा खटखटाया



मदुरै के एक मंदिर के पास दीया जलाने के विरोध में तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. मद्रास हाई कोर्ट ने श्रद्धालुओं को केंद्रीय अर्धसैनिक बल की सुरक्षा में दीप जलाने की अनुमति दी थी. लगभग डेढ़ हज़ार साल पुराने इस मंदिर से थोड़ी दूर एक दरगाह होने के चलते स्थानीय प्रशासन वहां दिया जलाने के पक्ष में नहीं है.

अरुलमिघु सुब्रमण्या स्वामी भगवान मुरुगन को समर्पित 6 प्रमुख मंदिरों में से एक है. वहां तमिल कार्तिक महीने की पूर्णिमा को ‘कार्थीगई दीपम’ (कार्तिक दीप) जलाने की परंपरा रही है. श्रद्धालु थिरुपरनकुंद्रम नाम की पहाड़ी की चोटी पर स्थित मंदिर के पारंपरिक दीपाथुन (दीप स्तंभ) में दीप जलाना चाहते हैं. राज्य सरकार के नियंत्रण वाली मंदिर प्रबंधक कमिटी ने काफी अरसे से इसे बंद कर रखा है. इसके बदले पहाड़ी के मध्य में स्थित एक दूसरे मंदिर में दीया जलाने की रस्म को पूरा किया जाता है.

3 दिसंबर को बेंच ने दिया आदेश

राजा रविकुमार नाम के एक श्रद्धालु ने मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच में मंदिर के दीपाथुन में दीप जलाए जाने के लिए याचिका दाखिल की. 1 दिसंबर को सिंगल बेंच ने मंदिर प्रबंधन को वहां दीया जलाने के लिए कहा, लेकिन इस आदेश का पालन नहीं हुआ. इसके बाद 3 दिसंबर को बेंच ने 10 श्रद्धालुओं को CISF की सुरक्षा में मंदिर में दीया जलाने को कहा. 

4 दिसंबर को HC ने लगाई प्रशासन को फटकार

सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ मदुरै ज़िला प्रशासन डबल बेंच में पहुंचा. 4 दिसंबर को डबल बेंच ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए सिंगल बेंच के आदेश को सही कहा. डबल बेंच ने कहा कि 1923 में ही कोर्ट फैसला दे चुका है कि दरगाह परिसर को छोड़ कर बाकी पूरी पहाड़ी अरुलमिघु सुब्रमण्या स्वामी मंदिर की है. मंदिर के अधिकार क्षेत्र में आने वाली जगह पर दीप प्रज्ज्वलन से मुसलमानों के धार्मिक अधिकार प्रभावित नहीं होते.

5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका

हाई कोर्ट की डबल बेंच की फटकार के बाद अब मदुरै प्रशासन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. तमिलनाडु सरकार की तरफ से शुक्रवार, 5 दिसंबर को चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच में रखा गया. चीफ जस्टिस ने कहा कि वह राज्य सरकार की याचिका को सुनवाई के लिए लगाने पर विचार करेंगे. इस दौरान कोर्ट में मौजूद मामले के मूल याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हाई कोर्ट की सिंगल बेंच अभी भी मामला सुन रही है. उसने अपने आदेश के पालन पर रिपोर्ट मांगी है. इससे बचने के लिए राज्य सरकार यहां आ गई है.



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