पाकिस्तान के नक्शे-कदम पर बांग्लादेश, मुनीर की तरह ट्रंप के चहेते बनना चाहते हैं यूनुस! अमेरिका के सामने पेश किया ये प्रस्ताव


बांग्लादेश पूरी तरह पाकिस्तान के नक्शे-कदम पर चल रहा है. शहबाज शरीफ सरकार के बाद अब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने गाजा पट्टी में शांति बहाल करने के लिए तैनात की जा रही पीस फोर्स में शामिल होने की इच्छा जताई है.  

बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान ने वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग में वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठकें कीं, जहां उन्होंने कहा कि ढाका गाजा में अपनी सेना भेजने के लिए तैयार है. सीएनएन-न्यूज़18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में भारत में अमेरिकी राजदूत और साउथ-मिडिल एशियाई मामलों के विशेष दूत  सर्जियो गोर भी मौजूद थे. बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को गाजा में स्थिरता बल के लिए सैनिकों की तैनाती हेतु अमेरिका से हरी झंडी मिल गई है. 

खलीलुर रहमान ने अमेरिकी अधिकारियों को घरेलू और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ गाजा शांति सेना में बांग्लादेश की संभावित भूमिका के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने देश में होने वाले आगामी चुनावों, द्विपक्षीय व्यापार, रोहिंग्या संकट और पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंधों पर भी चर्चा की.

बांग्लादेश गाजा में सेना क्यों भेज रहा है?

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश वाशिंगटन से रणनीतिक समर्थन हासिल करने के लिए मुस्लिम बहुल संघर्षों में सैन्य सहायता या सुरक्षा सहयोग की पेशकश कर रहा है. अमेरिकी अधिकारियों ने गाजा में बांग्लादेशी सैनिकों को पूर्ण समर्थन का आश्वासन पहले ही दे दिया है.

मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस इस कदम का इस्तेमाल अपने घरेलू समर्थकों, विशेष रूप से जमात-ए-इस्लामी के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं, जिसने लंबे समय से फिलिस्तीनी मुद्दे का समर्थन किया है. ट्रंप की गाजा शांति योजना का समर्थन करके मोहम्मद यूनुस आसिम मुनीर की तरह उनके चहेते बनने की कोशिश में जुटे हुए हैं. 

बता दें कि बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं. सूत्रों ने बताया कि गाजा में सेना भेजने का बांग्लादेश का प्रस्ताव और वाशिंगटन के साथ उसकी उच्च स्तरीय बातचीत का उद्देश्य सैन्य तैनाती से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरिम सत्ता को वैधता प्रदान करना है.

ट्रंप ने क्यों बनाई गाजा के लिए पीस फोर्स?

ट्रंप की 20 सूत्री शांति योजना में पाकिस्तान समेत मुस्लिम देशों की एक सेना द्वारा युद्धग्रस्त गाजा में पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार के लिए एक तय समय तक देखरेख करने का आह्वान किया गया है, जो इजरायली बमबारी के बाद तबाह हो गया था. कई देश गाजा में हमास समूह के निरस्त्रीकरण के मिशन को लेकर आशंकित हैं क्योंकि इससे उनकी फिलिस्तीन समर्थक आबादी में आक्रोश पैदा हो सकता है.



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