ट्रंप का ‘ट्रिगर’ तैयार, अमेरिका का सबसे विध्वंसक जंगी बेड़ा पहुंचा ईरान के पास, क्या मचने वाली है तबाही?


US Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान बातचीत में रुचि दिखा रहा है, लेकिन इस बयान के बाद तेहरान ने चेतावनी दी है कि हमारी उंगलियां ट्रिगर पर ही हैं. इसी बीच अमेरिका का सबसे विध्वंसक युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन ईरान के करीब पहुंच चुका है. 

अमेरिका के जंगी बेड़े का ईरान के पास पहुंचना यह संकेत देता है कि कुछ बड़ा होने वाला है. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप अपनी धमकी को सच साबित करेंगे, या फिर यह कदम ईरान पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है?

USS अब्राहम लिंकन और उसका जंगी बेड़ा

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के साथ पूरा जंगी बेड़ा चलता है. इस युद्धपोत को अमेरिका के दुश्मनों का काल माना जाता है और कहा जाता है कि यह युद्धपोत अकेले ही ईरान की पूरी सेना को धूल चटा सकता है. इसके साथ स्ट्राइक ग्रुप में गाइडेड मिसाइल क्रूजर, विध्वंसक जहाज, सबमरीन और अन्य युद्धपोत शामिल होते हैं. USS अब्राहम लिंकन को समंदर में चलने वाला सबसे बड़ा जंगी बेड़ा माना जाता है और इस युद्धपोत पर अमेरिका के सबसे घातक लड़ाकू विमान तैनात हैं.

जल, थल और नभ से प्रहार की क्षमता

USS अब्राहम लिंकन जल, थल और नभ कहीं से भी युद्ध की स्थिति में दुश्मन पर प्रचंड प्रहार कर सकता है. यदि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को नक्शे से मिटाने की धमकी दी है, तो इसके पीछे अमेरिका के पास मौजूद घातक हथियारों की ताकत है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के पास ऐसे विध्वंसक हथियार हैं, जो ईरान की पूरी सेना पर भारी पड़ सकते हैं. अमेरिका के कई खास हथियार सिस्टम ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल साइट्स जैसे खतरनाक टारगेट को चंद मिनटों में निशाना बना सकते हैं.

ईरान के एयर डिफेंस के सामने अमेरिका के हथियार

ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को रोक पाना मुश्किल माना जा रहा है. अमेरिका के पास ऐसे पांच हथियार हैं, जिनका तोड़ ईरान के पास नहीं है. ईरान और इजरायल के युद्ध के दौरान अमेरिका के स्टेल्थ बॉम्बर बी-2 ने ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह कर दिया था. ईरानी सेना का एयर डिफेंस सिस्टम और रडार अमेरिकी बी-2 बॉम्बर का पता लगाने में नाकाम रहे थे. यानी बी-2 बॉम्बर से निपटना ईरान के लिए मुश्किल नहीं, बल्कि लगभग असंभव है.

अमेरिका बना रहा 52 नए बी-2 बॉम्बर

महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका 52 नए बी-2 बॉम्बर तैयार कर रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका युद्ध की योजना को लेकर कुछ बड़ा सोच रहा है. यदि बात अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल की करें, तो यह मिसाइल ईरान में बर्बादी की नई इबारत लिख सकती है. सबमरीन और वॉरशिप से लॉन्च होने वाली टॉमहॉक मिसाइलें सटीक हमले के लिए मशहूर हैं. यह वही मिसाइल है जिसकी मांग यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ट्रंप से की थी, लेकिन ट्रंप ने इसे देने से इनकार कर दिया था. टॉमहॉक मिसाइल का लोहा पूरी दुनिया मानती है. यदि अमेरिका टॉमहॉक मिसाइल से ईरान पर हमला करता है, तो ईरान के कई शहरों में भारी तबाही तय है.

F-35, F-22 और MQ-9 रीपर: ईरान के लिए चुनौती

अमेरिकी F-35 और F-22 दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में गिने जाते हैं. ये दोनों ही पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं. वहीं, ईरानी वायुसेना आज भी दशकों पुराने लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करती है. ऐसे में अमेरिकी वायुसेना के सामने ईरानी वायुसेना टिक पाएगी, यह नामुमकिन लगता है. अमेरिकी वायुसेना के बेड़े में ऐसे लड़ाकू विमान भी हैं, जिन्हें ट्रैक, ट्रेस और टारगेट करने की क्षमता ईरान के पास नहीं है.

अमेरिकी MQ-9 रीपर एक खतरनाक ड्रोन है, जो 50 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरता है और 1850 किलोमीटर तक टारगेट को हिट कर सकता है. वॉशिंगटन इसे ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमलों के लिए इस्तेमाल कर सकता है, और यह ड्रोन 27 घंटे से लेकर 42 घंटे तक उड़ान भर सकता है.

‘हमारी उंगलियां ट्रिगर पर’

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के रिश्तों में खटास कोई नई बात नहीं है, लेकिन इजरायल-ईरान युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा है. दोनों देशों में धमकियों का दौर जारी है और ऐसे में हालात किसी भी दिन युद्ध तक पहुंच सकते हैं. इसी बीच ईरानी सेना ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने गुरुवार को वॉशिंगटन को चेतावनी दी कि बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद उनकी सेना की उंगलियां ट्रिगर पर हैं.

इजरायल हाई अलर्ट पर

अमेरिका और ईरान में बढ़ते तनाव को देखते हुए इजरायल भी वॉर मोड में चला गया है. देश में अलर्ट स्तर बढ़ाने के साथ ही ईरान की ओर से किसी भी संभावित हमले से निपटने के लिए पुलिस, फायर ब्रिगेड और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है. आईडीएफ के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जामिर ने कहा कि सेना किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तैयार है. इजरायली अखबार द टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार चीफ ऑफ स्टाफ ने कहा कि होम फ्रंट प्रशिक्षित और सक्षम है और हमारी सेना हाई अलर्ट पर है.



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