अमेरिका-ईरान के बीच हुआ समझौता तो क्या खुल जाएगा हॉर्मुज? पीस डील में क्या-क्या शामिल, जानें सब कुछ


ईरान और अमेरिका के बीच पिछले दो महीनों से ज्यादा वक्त से जारी युद्ध को लेकर पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने शनिवार को कहा कि तीन महीने से ज्यादा समय तक चले युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान शांति समझौते के एक ढांचे पर सहमत हो गए हैं. उम्मीद है कि 24 घंटों के भीतर शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे. 

मध्यस्थता की भूमिका में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक साइन की तैयारी कर रहा है. इसके बाद ही आगे के सप्ताह में तकनीकी स्तर की बातचीत होगी. अमेरिका और ईरान ने शुक्रवार को सिग्नल दिया था कि उनके युद्ध को समाप्त करने का समझौता बेहद ही करीब है. अमेरिका के सीनियर अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्ष एक मसौदे पर सहमत हो गए हैं. वॉशिंगटन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में शुरुआती समझौते पर साइन हो जाएंगे. ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि इन दोनों पक्षों के समझौते में क्या क्या शामिल है?

दोनों पक्षों के समझौते को लेकर क्या बात निकलकर आई सामने?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को जानकारी दी कि समझौते में अभी भी बदलाव संभव है. लेकिन अस्थायी तौर पर जो समझौता हुआ है, उससे पता चलता है, उनका देश इस संघर्ष से और मजबूत होकर उभरा है. उन्होंने बताया कि ईरान विजेता है. 

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बातचीत में शामिल सभी पक्षों के सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने पर सहमती बन सकती है.  ईरानी बंदरगाहों पर U.S. नौसेना की नाकेबंदी हटाने की बात कही गई है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत इसके बाद होगी. एक यूएस अधिकारी ने रॉयटर्स को नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि यह समझौता ट्रंप के मुख्य लक्ष्यों को पूरा करता है. बातचीत को बहुत अच्छी स्थिति में लाता है.

इनमें ईरान के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलने के बदले में U.S. ईरान की फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्ति जारी करना शुरू कर देगा. उसके तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा लेगा. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों की बातचीत के दौरान चर्चा की जाएगी. इस समझौते से आखिरकार ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म हो जाएगा. उसके अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को नष्ट करके हटा दिया जाएगा. 

सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावों में तेहरान के लिए संभावित युद्ध हर्जाने पर चर्चा हुई है. इसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर सीमाएं तय करने की U.S. की लंबे समय से चली आ रही मांगों को छोड़ने की बात भी शामिल है.

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