चीन और अमेरिका में छिड़ी नई जंग! अब चीनी करेंसी के दम पर ट्रंप को आंख दिखाएंगे जिनपिंग, युआन की बल्ले-बल्ले


चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी डॉलर को इंटरनेशनल इकोनॉमी में बड़ी चुनौती दी है. उन्होंने कहा है कि चीन को अपनी करेंसी युआन को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि दुनिया के देश इसे इंटरनेशनल रिजर्व करेंसी के रूप में इस्तेमाल करें और जमा करें. फिलहाल वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी 58-60% के आसपास है. शी जिनपिंग ने यह बात कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख थ्योरेटिकल जर्नल ‘किउशी’ में छपे एक लेख में कही है.

युआन को ग्लोबल रिजर्व करेंसी बनाने की कोशिश

यह बयान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. शी जिनपिंग ने साफतौर पर कहा कि युआन का अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होना चाहिए. इससे युआन को ग्लोबल रिजर्व करेंसी का दर्जा मिलेगा. हालांकि उन्होंने डॉलर का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ है कि चीन अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहता है.

पिछले साल चीन के कुल 6.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के विदेशी व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा लोकल करेंसी यानी युआन में सेटल हुआ. चीन ने रूस के साथ मिलकर क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम (CIPS) नाम का पेमेंट सिस्टम बनाया है, जो SWIFT का विकल्प है. रूस से तेल-गैस खरीदते समय युआन का इस्तेमाल बढ़ रहा है. चीन ने लगभग 50 देशों के साथ करेंसी स्वैप समझौते किए हैं. BRICS देशों में कॉमन करेंसी और BRICS Pay सिस्टम की बात चल रही है.

चीन का कैपिटल मार्केट बड़ा है पर मजबूत नहीं

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि चीन की बैंकिंग एसेट्स, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और कैपिटल मार्केट बहुत बड़े हैं, लेकिन अभी ‘बड़ा है पर मजबूत नहीं’. एक मजबूत फाइनेंशियल पावरहाउस बनने में समय लगेगा. इसके लिए मजबूत करेंसी, सेंट्रल बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, अंतरराष्ट्रीय केंद्र, अच्छी निगरानी और टैलेंट की जरूरत है. चीन का अपना वित्तीय विकास मॉडल पश्चिमी मॉडल से अलग होगा और मजबूत आर्थिक नींव पर टिका होगा.

पिछले एक साल में युआन डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बावजूद चीन ने 2025 में रिकॉर्ड ट्रेड सरप्लस बनाया और अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा. यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था में बहुपक्षीय मुद्रा प्रणाली की ओर ले जा सकता है, जहां डॉलर के अलावा युआन जैसी मुद्राओं की भूमिका बढ़ेगी.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *