बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में BNP की भारी जीत के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा ‘1996 की गंगा जल संधि’ के नवीनीकरण पर है. यह संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है और नई BNP सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह इस संधि को अब सिर्फ भारत के राज्यों के हितों के आधार पर नहीं, बल्कि बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखकर देखेगी. इसके अलावा तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत पर चिंता भी जाहिर कर दी है.
हुमायूं ने भारत को लेकर क्या चिंता दिखाई?
अगस्त 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश की सत्ता से जाने के बाद वहां बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं, जिनमें हिंदुओं को निशाना बनाया गया है. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के साथ-साथ उनके मंदिरों को भी निशाना बनाया गया है. लेकिन हुमायूं कबीर ने इस मुद्दे पर बोलने के बजाए भारत पर ही टिप्पणी कर दी. कबीर ने कहा कि भारत में सांप्रदायिक घटनाएं बांग्लादेश के लिए ‘चिंता का विषय’ हैं. बांग्लादेश के लोगों को लगता है कि भारत असहिष्णु समाज बनता जा रहा है और वहां कट्टरपंथी बयानबाजी के सहारे चुनाव जीते जा रहे हैं, जो चिंताजनक है.’
हुमायूं ने यह भी कहा कि अब भारत को स्वीकार कर लेना चाहिए कि बांग्लादेश की सत्ता बदल चुकी है. शेख हसीना और अवामी लीग अब बांग्लादेश में मौजूद नहीं है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी सत्ता में नहीं आ सकी क्योंकि उसने कट्टरपंथी बयानबाजी का सहारा लिया. कबीर ने कहा, ‘ऐसी बयानबाजी से बांग्लादेश में कभी चुनाव नहीं जीता जा सकता, लेकिन भारत में लोग इसके पक्ष में वोट दे रहे हैं.’
बांग्लादेश के राष्ट्रिय हितों के आधार पर होगा फैसला
हुमायूं कबीर ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘1996 की गंगा जल संधि को रिन्यू करने का फैसला बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हित के आधार पर करेगा. पहले बांग्लादेश को अक्सर उन भारतीय राज्यों के हितों के बारे में बताया जाता रहा है जो नदी जल समझौतों से जुड़े हैं. हम ऐसे तरीके से आगे बढ़ेंगे जिससे हमारा राष्ट्रीय हित पूरा हो.’
गंगा जल संधि 1996 में शेख हसीना के समय हुई थी और यह 30 साल की है. संधि के तहत फरक्का बैराज से सूखे के मौसम में गंगा का पानी दोनों देशों के बीच बांटा जाता है. बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक पानी मिलने का प्रावधान है, लेकिन बांग्लादेश लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि सूखे में पानी कम मिलता है. इससे खुलना, सतखीरा जैसे दक्षिण-पश्चिम इलाकों में नमक पानी बढ़ जाता है, खेती बर्बाद होती है, मछली पालन प्रभावित होता है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है.
गंगा संधि बातचीत का पहला मुद्दा
भारत की तरफ से पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य सूखे में ज्यादा पानी की मांग करते हैं. अब संधि खत्म होने पर नई संधि या नवीनीकरण की बातचीत होगी. BNP सरकार का रुख साफ है कि वह बांग्लादेश के कृषि, पर्यावरण और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देगी. हुमायूं कबीर ने कहा कि यह बातचीत का पहला और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होगा.
यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले 30 साल में संधि की व्याख्या और अमल में भारतीय राज्यों की मांगों का दबाव ज्यादा रहा है. BNP की ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति के तहत अब बांग्लादेश ज्यादा आक्रामक और निष्पक्ष बंटवारे की मांग करेगा. साथ ही बॉर्डर पर BSF की कार्रवाई, अल्पसंख्यक सुरक्षा और व्यापार जैसे मुद्दे भी बातचीत में आएंगे, लेकिन गंगा जल संधि सबसे संवेदनशील और तत्काल मुद्दा बनेगा.
भारत-बांग्लादेश में कठिन बातचीत का दौर
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी और मजबूत संबंधों की बात की. लेकिन गंगा संधि का नया दौर दोनों देशों के लिए कठिन बातचीत का संकेत दे रहा है. बांग्लादेश अब अपनी पानी की जरूरतों को पहले रखेगा, जिससे भारत को पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के साथ संतुलन बनाना पड़ेगा. यह संधि न सिर्फ पानी का बंटवारा है, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास और रणनीतिक रिश्तों का भी परीक्षण होगी.