Exclusive: यूरोप में पाकिस्तान का नैरेटिव ऑपरेशन, सिंधु जल संधि पर ब्रुसेल्स में सहानुभूति तलाशने की फिराक में दुश्मन


आज से 14 महीने पहले भारत ने पाकिस्तानी पोषित आतंकवाद से निपटने के लिए सिंधु जल संधि को स्थगित किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं. पिछले 14 महीने में पाकिस्तान ने कई देशों के माध्यम से भरसक कोशिश की कि भारत को मनाया जाए और सिंधु जल संधि को फिर से लागू करवाया जाए. इतनी ही नहीं बल्कि शहबाज सरकार भारत पर दबाव बनाने के लिए कथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में भी गई, लेकिन भारत ना किसी दबाव में आया और ना ही सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के फैसले में कोई बदलाव किया.

पाकिस्तानी सरकार अब यूरोपीय देश बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में 18 जून को एक थिंक टैंक की मदद से साझा कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जिसमें सिंधु जल समझौते के मुद्दे को उठाया जाएगा और पाकिस्तान को पीड़ित बताने की कोशिश की जाएगी कि अगर भारत ने सिंधु जल संधि फिर से नहीं लागू की तो पाकिस्तान के लोग भूखे प्यासे मर जाएंगे और खेत बंजर हो जाएंगे.

ट्रांसबाउंडरी वाटर रिसोर्सेज: ए वेपनाइज़्ड ग्लोबल कॉमन” नाम के इस कार्यक्रम का आयोजन बेल्जियम का थिंक टैंक सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी स्टडीज़ (CEPS) और यूरोपीय संघ, बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग में पाकिस्तान का दूतावास संयुक्त रूप से कर रहा है. इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री डॉ. इशाक डार का रिकॉर्डेड मुख्य संबोधन कार्यक्रम में प्रसारित किया जाएगा. साथ ही पाकिस्तान के केंद्रीय जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मसूद मलिक कार्यक्रम में शामिल होंगे, जिससे समझ आ रहा है कि पाकिस्तान भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के बाद कितना परेशान और उतावला है.

दो सत्रों में आयोजित होगा कार्यक्रम
एबीपी न्यूज़ के पास कार्यक्रम के एजेंडा की कॉपी है, जिसके मुताबिक सम्मेलन की शुरुआत सीईपीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरेल लानू और यूरोपीय संघ, बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग में पाकिस्तान के राजदूत रहीम हयात कुरैशी करेंगे. इसके बाद पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री डॉ इशाक डार का रिकॉर्डेड संबोधन प्रसारित किया जाएगा. एजेंडा के मुताबिक कार्यक्रम के दो सत्र हैं. 

कौन-कौन होगा शामिल
पहला सत्र पाकिस्तान के जलवायु और जल संबंधी नैरेटिव पर केंद्रित होगा, जिसकी अध्यक्षता सीईपीएस की जलवायु कार्यक्रम प्रमुख डॉ. इसाबेल शेकेनबाख करेंगी और इसमें ईसीडीपीएम की एसोसिएट डायरेक्टर सोफी डेसमिड्ट और पाकिस्तान के केंद्रीय जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मसूद मलिक शामिल होंगे. इस सत्र में पाकिस्तान सिंधु जल समझौते को स्थगित करने की वजह से देश में बाढ़, खाद्य सुरक्षा और निचले क्षेत्रों की जल संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की कोशिश करेगा.

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा 
सम्मेलन के एजेंडे में बार-बार सिंधु नदी बेसिन का उल्लेख किया गया है और जल बंटवारे के विवाद को जलवायु संकट, अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से पेश करने की कोशिश की गई है. दूसरा सत्र सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय जल बंटवारे की व्यवस्थाओं और सिंधु जल संधि से जुड़े कानूनी और कूटनीतिक तर्कों पर केंद्रित होगा, जिसकी अध्यक्षता सीईपीएस की रिसर्च फेलो डॉ. सेरेन एरगेन्च करेंगी. पैनल में सिंधु जल संधि मामलों में पाकिस्तान सरकार के पूर्व कानूनी सलाहकार रहे फैसल हुसैन नकवी भी शामिल होंगे. इसके अलावा यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय की वरिष्ठ शोधकर्ता कैथी सुइकेंस और पत्रकारिता की आड़ में लगातार भारत विरोधी प्रचार और भ्रामक नैरेटिव फैलाने के लिए कुख्यात दानिश कय्यूम भी शामिल होगा.

सम्मेलन के विवरण में साझा जल संसाधनों को लगातार हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है और सिंधु बेसिन को एक प्रमुख विवादित क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे साफ है कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक संगठित नैरेटिव तैयार करने की कोशिश कर रहा है और पश्चिमी देशों का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचना चाहता है. हालांकि जितनी कोशिश और पैसा पाकिस्तान सिंधु जल संधि के स्थगित होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय लॉबी में लगा रहा है अगर उतनी ही कोशिश पाकिस्तान ने अपने देश में आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने के लिए की होती तो पाकिस्तान को ये सब करने की जरूरत ही नहीं होती.

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