तारिक रहमान के PM बनते ही ड्रैगन ने चली चाल, तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट पर फिर भेजा मैसेज, भारत के लिए झटका!


चीन ने एक बार फिर भारत को झटका देते हुए नई चाल चली है. ड्रैगन ने तारिक रहमान के सत्ता संभालते ही बांग्लादेश को तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट एक बार फिर मैसज भेजा है. बांग्लादेश में चीनी राजदूत याओ वेन ने रविवार को बताया कि चीन और बांग्लादेश तीस्ता नदी कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट और रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट पर लंबे समय से बातचीत कर रहे हैं. साथ ही उम्मीद जताई है कि इस प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू होगा. उन्होंने विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के साथ मीटिंग के बाद पत्रकारों से ये बात कही है. 

चीनी PM ने भी तारिक रहमान को दी बधाई

इसके अलावा चीन के राजदूत की तरफ से हाल ही में संपन्न हुए बांग्लादेश चुनाव को लोकतंत्र की जीत बताया है. साथ ही कहा कि दोनों देशों के बीच हाई लेवल दौरे जारी रहेंगे. 17 फरवरी 2026 को स्टेट काउंसिल के चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनने की बधाई भी दी है. 

बांग्लादेश चुनाव के बाद क्या बोला चीन?

एक संदेश जारी करते हुए चीन ने लिखा कि दोनों देश पड़ोसी हैं. उनके बीच लंबे वक्त से दोस्ती है. वे कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक कोऑपरेटिव पार्टनर हैं. दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्ता भी पुराना है. ली ने कहा है कि दोस्ती के पिछले 51 सालों में डिप्लोमेटिक रिश्ते बनने के बाद चीन और बांग्लादेश ने हमेशा से एक दूसरे का सम्मान किया है. एक दूसरे के साथ व्यवहार भी समान है. आपसी फायदे के लिए सहयोग और जीत वाले नतीजों को आगे बढ़ाया है. इससे देशों के बीच लेनदेन का एक अच्छा उदाहरण पेश हुआ है. इसके अलावा चीन ने बांग्लादेश को समर्थन भी जताया है. 

किन-किन परियोजनाओं पर बोला ड्रैगन?

ली ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ लंबे समय से चली आ रही दोस्ती आगे बढ़ाने और सभी सेक्टर में हाई क्वालिटी बेल्ट एंड रोड सहयोग, लेन-देन को बढ़ाने, और चीन-बांग्लादेश कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक कोऑपरेटिव पार्टनरशिप को एक नए लेवल पर ले जाने के लिए काम करने को तैयार हैं. ताकि दोनों देशों को ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके. 

तीस्ता प्रोजेक्ट पर चीन से निवेश चाहता है बांग्लादेश

तीस्ता नदी पर इस परियोजना के लिए बांग्लादेश करीब एक बिलियन डॉलर खर्च करेगा, जिसका करीब 85 फीसदी वो चीन से लोन लेगा. हालांकि ये भारत के लिए एक झटके की तरह होगा क्योंकि जिस जगह पर ये प्रोजेक्ट है, वो भारत के चिकन नेक से करीब 25-30 किमी की दूरी पर है. अगर इस जगह चीन पहुंचकर निर्माण संबंधी गतिविधियों को अंजाम देगा तो भारत को काफी सावधान रहना होगा.



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