‘ईरान के 100 से ज्यादा जहाजों को डुबोया, 7 हजार टारगेट तबाह’, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी पर बोले ट्रंप


मिडिल ईस्ट जंग को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (16 मार्च 2026) को दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत खत्म हो चुकी है. उन्होंने कहा कि ईरान में 7000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर कहा कि हम चाहते हैं कि चीन और जापान आकर हमारी मदद करें.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘ईरानी सरकार को समाप्त करने के लिए हमारा पावफुल सैन्य अभियान पिछले कुछ दिनों से पूरी ताकत से जारी है. उन्हें लगभग पूरी तरह से तबाह कर दिया गया है. उनकी (ईरान) वायु सेना और नौसेना खत्म हो गई है. उनके 100 से ज्यादा जहाज और कई वॉरशिप डुबा दिए गए हैं.  एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम, उनका रडार नष्ट हो गया है और उनके नेता भी मारे गए हैं. वे 47 सालों से आतंक फैला रहे थे और अब उनके खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है, जो कई साल पहले लेना चाहिए था.’

ईरान के 7000 से अधिक ठिकाने तबाह: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘जंग की शुरुआत से ही हमने ईरान में 7,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए, जिनमें से अधिकतर कर्मिशयल और सैन्य ठिकाने थे.  उनके बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च में 90 फीसदी और ड्रोन हमलों में 95 फीसदी की कमी आई है. हमने मिसाइलों और ड्रोनों के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर भी हमले किए हैं और यह सिलसिला आज भी जारी है. हमने आज ही उनमें से तीन पर हमला किया है.’

ट्रंप ने कहा, ‘हमने खार्ग द्वीप पर हमला किया और उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया. हमने द्वीप पर तेल भंडार वाले क्षेत्र को छोड़कर बाकी सब कुछ तबाह कर दिया. हमने पाइपलाइनें वहीं छोड़ दीं. हम ऐसा नहीं करना चाहते थे, लेकिन हमें ऐसा करना पड़ा. भविष्य में उस देश (ईरान) के पुनर्निर्माण के उद्देश्य से मुझे लगता है कि हमने सही काम किया. अब ईरान फिर से मिसाइल और ड्रोन क्षमता को नहीं बढ़ा पाएगा क्योंकि हमने उसे नष्ट कर दिया है.’

होर्मुज स्ट्रेट को अच्छी स्थिति में रखा है: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को हमने बहुत अच्छी स्थिति में रखा है. उन्होंने दावा किया, ‘हमने ईरान को पहले ही काबू में कर लिया है. चूंकि यह एक संकरा इलाका है, यही एक कारण है कि ईरान हमेशा से इसका इस्तेमाल एक हथियार के रूप में करता आया है. ईरान ने हमेशा इसका इस्तेमाल आर्थिक हथियार के रूप में किया है और यह बहुत लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. कई देशों ने मुझे बताया है कि वे इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. कुछ देश इसके लिए बहुत उत्साहित हैं और कुछ ऐसे देश हैं जिनकी हमने कई वर्षों से मदद की है.’

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