ईरान के लिए रक्तबीज बन गई है IRGC-बसिज फोर्स! हर मौत के बाद तैयार हो रहे नए लड़ाके


हमारे पौराणिक आख्यानों में एक कैरेक्टर का जिक्र मिलता है, जिसका नाम रक्तबीज है. इसका अर्थ उस असुर या दानव से है, जिसके शरीर का एक बूंद खून भी अगर जमीन पर गिरा तो उस खून से एक नया रक्तबीज तैयार हो जाएगा, जो पुराने रक्तबीज की तरह की ताकतवर होगा और लड़ाई अब नया रक्तबीज लड़ेगा. अमेरिका के साथ चल रही जंग में ईरान ने भी ऐसे ही रक्तबीज तैयार कर रखे हैं, जिसकी वजह से अमेरिका और इजरायल भले ही एक-एक करके ईरान के तमाम बड़े नेताओं और सैन्य अधिकारियों का मारता जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद ईरान में नया नेतृत्व पैदा होता जा रहा है. जो ये नया नेतृत्व पैदा हो रहा है वो पहले के मुकाबले और भी घातक हमले करने के लिए तैयार होता जा रहा है. 

ईरान के लिए रक्तबीज बन गई है IRGC

मार्कंडेय पुराण के मुताबिक इस धरती पर शुंभ और निशुंभ नाम के दो दानव हुए थे. उनके सेनापति का नाम रक्तबीज था, जिसे भगवान शिव से ये वरदान हासिल था कि अगर युद्ध में उस पर हमला हुआ और उसकी खून की एक भी बूंद जमीन पर गिरी तो एक नया रक्तबीज तैयार हो जाएगा. जब देवी दुर्गा ने शुंभ और निशुंभ का वध करने के लिए लड़ाई शुरू की तो लड़ाई रक्तबीज से भी हुई. रक्तबीज पर जब हमला हुआ तो उसका खून धरती पर गिरने लगा, जिससे एक नहीं, बल्कि हजारों रक्तबीज पैदा हो गए. लड़ाई अंतहीन होती गई और तब देवी दुर्गा ने काली का रूप धारण किया, जिनके एक हाथ में खप्पर था.

रक्तबीज पर हमले के बाद उसकी खून की बूंदों को धरती पर गिरने से पहले ही देवी काली उस रक्त को अपने खप्पर में समेट लेतीं और उसे पी जातीं. नतीजा ये हुआ कि एक-एक करके सारे रक्तबीज मारे गए और फिर शुंभ-निशुंभ का भी वध हो गया. आपने दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के बाद आरती में जरूर गाया होगा कि

चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

अमेरिका-इजरायल पर और घातक हमला कर रहा ईरान

इसमें जो शोणित बीज शब्द है, वो रक्तबीज के लिए ही इस्तेमाल किया गया है. अब रक्तबीज दानव था तो उसका मरना जरूरी था, लेकिन ईरान में जो मारे जा रहे हैं, वो इंसान हैं. जीते-जागते हाड़-मांस के लोग, जो सिर्फ इस वजह से मारे जा रहे हैं क्योंकि अमेरिका को और इजरायल को लगता है कि उनकी शुरू की गई इस जंग का खात्मा उनके मरने से ही होगा, लेकिन जंग तो खत्म होती दिख ही नहीं रही है. इस जंग को शुरू करने के साथ ही अमेरिका और इजरायल ने सबसे पहले ईरान के सु्प्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को मार दिया तो उनकी जगह मोज्तबा खामेनेई ने ले ली, जो अपने पिता अली खामेनेई से भी घातक निकले. 

उसी हमले में ईरान की आर्म्ड फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुल रहीम मौसवी मारे गए तो कार्यवाहक परिषद ने सेना की कमान संभाल ली, जो जंग लड़ ही रही है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की ‘ग्राउंड फोर्स’ के कमांडर मोहम्मद पकपुर को अमेरिका ने मार दिया तो नया कमांडर आ गया. रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह मारे गए तो उनकी जगह सैयद माजिद ईब्न अल रजा ने ले ली, जो खुद ही मैदान-ए-जंग में डट गए हैं.

ईरान के टॉप लीडरशिप की मौत

अयातुल्लाह अली खामेनेई के सैन्य प्रमुख मोहम्मद शिराजी को भी अमेरिका मार ही चुका है. अब तो नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के मुखिया अली लारिजानी और डिफेंस काउंसिल के मुखिया अली शामखानी को भी अमेरिका और इजरायल ने मिलकर मार गिराया है. ईरान के अर्धसैनिक बल बसिज के कमांडर घोलामरेज़ा सोलेमानी भी मारे जा चुके हैं. बाकी तो डिफेंस रिसर्च के होसैन जबल अमेलियन, इंटेलिजेंस अधिकारी सालेह असादी और पुलिस इंटेलिजेंस चीफ गुलाम रेजा रेजाइयान भी मारे गए हैं.

किसी भी हालत में ईरान नहीं झुकेगा: अराघची 

फिर भी ईरान न तो टूटा है और न ही झुका है, बल्कि वो तो अब और भी ताकत से हमला कर रहा है. पुरानी लीडरशिप के खात्मे के बाद जो नई लीडरशिप है, वो पूरी तरह से ईरान की एलिट यूनिट IRGC से जुड़ी हुई है, जो ज्यादा ताकतवर और ज्यादा कट्टर है. खुद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची कह ही रहे हैं कि ईरान में कोई भी मरेगा तो दूसरा उसकी जगह ले लेगा और अगर मैं भी मारा जाता हूं तो कोई नया शख्स ईरान का विदेश मंत्री बन जाएगा, लेकिन किसी भी सूरत में ईरान झुकेगा नहीं.

ईरान ने पिछले करीब 20 साल में खुद को इस कदर तैयार कर रखा है कि वहां सिस्टम किसी आदमी पर नहीं बल्कि संस्था पर चलता है. विदेश मंत्री अराघची ने भी यही कहा है कि एक आदमी के जाने से सिस्टम नहीं टूटता. ऐसे में पुरानी लीडरशिप के जाने से जो शून्य पैदा हो रहा है. उसे IRGC के वो जनरल भरते जा रहे हैं जो सीधे हमले और बदले की नीति पर यकीन रखते हैं.

ईरान पर हमला कर कैसे फंस गया अमेरिका?

अब जंग लंबी होती जा रही है और इजरायल-अमेरिका में से किसी को ऐसा कोई रास्ता नजर आ रहा है, जिससे इस जंग का खात्मा हो सके. ऑप्शन दो ही हैं या तो इस जंग को और लंबा खींचा जाए और भी ईरानी जनरल मारे जाएं और तब तक ये जंग चलती रहे, जब तक ईरान सरेंडर न कर दे या फिर अमेरिका और इजरायल अपनी सेना भेजें जो आमने-सामने की जंग लड़े.

पहले ऑप्शन में खतरा ये है कि जंग लंबी चली तो पूरी दुनिया में तेल और गैस के लिए हाहाकार मच जाएगा, जिससे और भी देशों को इस जंग में शामिल होना पड़ेगा, जो तीसरे विश्वयुद्ध की तरफ जाएगा. जबकि दूसरे ऑप्शन का खतरा ये है कि अमेरिकी सेना फिर से ईरान में वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान जैसी ही फंस जाएगी, जिसका अंजाम बेहद भयानक होगा.



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