डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में अमेरिकी राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी केंद्र के पूर्व निदेशक जो केंट ने ईरान जंग का ठीकरा इजरायल पर फोड़ा है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को ये विश्वास दिलाया गया था कि वेनेजुएला में निकोलस मादुरो के खिलाफ अभियान की सफलता के बाद अमेरिकी सेना ईरानी शासन को भी आसानी से हटा सकती है.
वेनेजुएला की घटना का जिक्र कर क्या कहा
जो केंट ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के आस-पास के बहुत छोटे सर्कल ने उन्हें कोई विकल्प सुनने ही नहीं दिया. केंट ने रूस टुडे को बताया, “जून के बाद उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के चारों ओर एक बहुत छोटा सर्कल बना लिया और उन्हें कोई विकल्प सुनने को नहीं मिला. फिर वेनेजुएला की घटना हुई और राष्ट्रपति ट्रंप को यह विश्वास दिलाया गया कि हमारी सेना इसी तरह सीधे ईरान में भी जाकर नेताओं को हटा सकती है और सब कुछ बिना किसी गड़बड़ी के हो जाएगा.”
केंट ने कहा कि जनवरी में ईरान में आर्थिक कुप्रबंधन और बढ़ती महंगाई के विरोध में प्रदर्शन शुरू होने के बाद इजरायल ने ट्रंप को बमबारी करने और प्रदर्शनकारियों के कुछ विरोधियों को खत्म करने के लिए मना लिया. इजरायल को उम्मीद थी कि प्रदर्शनकारियों के मारे जाने के बाद वे खुद ही सत्ता संभाल लेंगे.
ट्रंप को यह आसान ऑपरेशन बताया गया था- केंट
केंट ने इजरायली प्रस्ताव के बारे में कहा, “यह इराक की स्थिति जैसा लगता है कि हमारा स्वागत मुक्तिदाता के रूप में किया जाएगा. हम प्रदर्शनकारियों को मारने वाले आईआरजीसी पर बमबारी करेंगे और फिर प्रदर्शनकारी सत्ता संभाल लेंगे.” उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप को यह एक आसान ऑपरेशन बताया गया था.
बता दें कि जो केंट का ये बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ने इस बात से इनकार किया है कि तेल अवीव ने उन्हें ईरान के साथ युद्ध में जाने के लिए राजी किया था. ईरान संग जंग की शुरुआत 28 फरवरी को तेहरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या से हुई थी. पूर्व अधिकारी के अनुसार ट्रंप इस ऑपरेशन को लेकर संशय में थे, लेकिन उनके आसपास मौजूद ट्रूमैन शो वाले माहौल ने उन्हें इसके लिए आसानी से राजी कर लिया.
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