ईरान-अमेरिका तनाव और जंग की खबरों के बीच एक बड़ी खबर आई है. चीन की नौसेना का युद्धपोत ‘द किंग’ बुधवार को पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर लंगर डाल चुका है. इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. इस मामले को ईरान से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान नौसेना ने साफ कर दिया है कि इसका उस जंग से कोई लेना-देना नहीं है.
चीन का जहाज पाकिस्तान क्यों पहुंचा है?
यह जहाज पाकिस्तान और चीन की नौसेनाओं के बीच होने वाले संयुक्त समुद्री अभ्यास में हिस्सा लेने आया है. पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों ने पूरा एस्कॉर्ट करके इसे बंदरगाह तक पहुंचाया और वहां औपचारिक स्वागत भी किया गया. बंदरगाह पर पाकिस्तानी और चीनी झंडे लहराते दिखे, जो दोनों देशों के गहरे दोस्ती को दिखाता है.
इस अभ्यास का नाम है सी गार्डियन-IV. यह 25 मार्च से शुरू हो चुका है और 2 अप्रैल तक चलेगा. यह दोनों देशों के बीच इस सीरीज का चौथा अभ्यास है. पहले तीन अभ्यास भी अच्छे से हो चुके हैं. इसका मकसद दोनों नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना और समुद्री सुरक्षा के मामले में सहयोग को और मजबूत करना है.
चीन-पाकिस्तान सैन्य अभ्यास में क्या-क्या होगा?
इस सैन्य अभ्यास के दौरान कई तरह की गतिविधियां होंगी. इसमें बंदरगाह पर विशेषज्ञों के साथ चर्चाएं, युवा अधिकारियों के लिए सेमिनार, तोपची अभ्यास यानी गन्नरी फायरिंग, समन्वित गश्त और समुद्री सुरक्षा से जुड़े दूसरे ऑपरेशन शामिल हैं. पाकिस्तान नौसेना ने कहा है कि यह अभ्यास क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
पाकिस्तान को हथियार दे रहा चीन
चीन और पाकिस्तान के सैन्य संबंध पिछले कई सालों से काफी मजबूत हो गए हैं. चीन पाकिस्तान को हथियार और आधुनिक सैन्य तकनीक दे रहा है. पाकिस्तान की थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों को चीनी उपकरण मिल रहे हैं. दोनों देश नियमित रूप से संयुक्त अभ्यास करते रहते हैं, जो उनके लंबे समय के दोस्ती का सबूत है.
हालांकि ‘द किंग’ के कराची पहुंचने से चर्चाएं जरूर शुरू हो गईं क्योंकि पाकिस्तान और ईरान पड़ोसी हैं, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने साफ कहा कि यह दौरा पहले से तय अभ्यास का हिस्सा है और ईरान वाली स्थिति से जुड़ा नहीं है. फिलहाल दोनों नौसेनाएं मिलकर अभ्यास को सफल बनाने में जुटी हुई हैं.