44.4 टन प्लूटोनियम, 5,500 परमाणु बम…सबसे बड़ी न्यूक्लियर पावर बनने की कगार पर चीन का ये पड़ोसी, जिनपिंग की अटकी सांसें?


ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के बीच चीनी मीडिया ने बड़ा खुलासा किया है. चीनी मीडिया ने बताया है कि एक एशियाई देश अमेरिका और रूस से भी बड़ी न्यूक्लियर पावर बनने की राह पर है और वो देश है जापान. रिपोर्ट में जापान की डिफेंस इंडस्ट्री और प्लूटोनियम भंडार का खुलासा करते हुए कहा गया है कि उसका मकसद सिर्फ न्यूक्लियर हथियार बनाना नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति बनना भी है. रिपोर्ट में इसे जापान की सीक्रेट महत्वकांक्षा करार दिया गया है.

चीन के सरकारी सैन्य मुखपत्र पीएलए डेली ने 30 मार्च को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें जापान पर कई गंभीर आरोप लगाए गए और दुनिया को चेतावनी दी गई कि टोक्यो के पास परमाणु हथियार बनाने की सामग्री का इतना बड़ा भंडार है कि बहुत ही कम समय में वो दुनिया की सबसे बड़ी न्यूक्लियर पावर बन जाएगा. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि जापान अपनी डिफेंस इंडस्ट्री, कपैसिटी और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को खतरनाक तरीके से बढ़ा रहा है. 

जापान के पास 44.4 टन प्लूटोनियम का विशाल भंडार
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि जापान ने रेड लाइन क्रॉस कर दी है और उसके पास परमाणु हथियार बनाने के लिए विशाल भंडार है., जिसमें 44.4 टन का प्लूटोनियम है. रिपोर्ट के अनुसार इतने प्लूटोनियम से जापान 5,500 परमाणु हथियार बना सकता है. यह आंकड़ा रूस और अमेरिका से भी ज्यादा है. इस वक्त रूस 5,400 हथियारों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति है.

फ्रांस और ब्रिटेन में भी जापान के प्लूटोनियम का भंडार
जापान की क्योदो न्यूज एजेंसी में भी पिछले साल बताया गया था कि टोक्यो के पास 44.4 टन प्लूटोनियम का भंडार है, यह प्लूटोनियम जापान के अंदर और बाहर ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में स्टोर है, जहां जैपनीज न्यूक्लियर प्लांट्स से निकलने वाले रेडियोएक्टिव कचरे को प्लूटोनियम में परिवर्तित किया जाता है. इसका इस्तेमाल सैन्य लक्ष्यों के लिए किया जा सकता है. जापान-आसियान इंटीग्रेशन फंड (JAIF) के अनुसार जापान के अंदर 8.6 टन प्लूटोनियम का भंडार है, जबकि 35.8 टन प्लूटोनियम बाहर है, 21.7 टन ब्रिटेन में और 14.1 टन फ्रांस में है.

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर जापान अपने तीन परमाणु-विरोधी सिद्धातों के तहत खुद से लगाए गए प्रतिबंधों को हटा देता है तो वो बहुत ही कम समय में बड़ी परमाणु शक्ति बन सकता है. ये परमाणु विरोधी सिद्धांत साल 1967 में पूर्व जापानी प्रधानमंत्री इसाकू सातो के कार्यकाल में लाए गए और 1971 में संसदीय प्रस्ताव के रूप में अपनाए गए.

जापान बढ़ा रहा डिफेंस इंडस्ट्री
परमाणु विरोधी सिद्धांत हैं- 1. न तो जापान परमाणु हथियार रखेगा, 2. न ही परमाणु हथियार बनाएगा, 3. न ही जापान के क्षेत्र में परमाणु हथियार के प्रवेश की अनुमति देगा. हालांकि, पीएलए डेली की रिपोर्ट का कहना है कि जापान नागरिक प्रौद्योगिकी की आड़ में अपनी डिफेंस इंडस्ट्री का विस्तार कर रहा है. रिपोर्ट में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि जापान ने अपने टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन रिसर्च प्रोग्राम के लिए 2025 में 109.6 मिलियन डॉलर आवंटित किए थे, यह आंकड़ा 2022 से 18 गुना ज्यादा है. 

NPT के सदस्य हैं ईरान और जापान
खास बात ये है कि ईरान और जापान दोनों ही नॉन-प्रॉलिफरेशन ट्रीटी (NPT) के सदस्य हैं. यह संधि पांच देशों- अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के अलावा बाकी सदस्य देशों को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देती है. 1968 में इस पर हस्ताक्षर किया गया था और 1970 में इसे लागू किया गया. इसका मकसद परमाणु हथियार और हथियार प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है. भारत इसका सदस्य नहीं है. 

 

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