भारत के पड़ोसी देश चीन ने बॉर्डर पर कंट्रोल कड़ा कर दिया है. साथ ही वैक्सीन प्रोडक्शन को बढ़ा दिया है. इसके अलावा अपने ही यहां के मवेशियों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया है. इसकी वजह है, उत्तर पश्चिमी इलाके में फुट एंड माउथ बीमारी का छोटे स्तर तक फैलाना है.
चीन के अधिकारियों का कहना है कि यह एक विदेशी बीमारी है. कृषि मंत्रालय ने बताया कि उसने जानवरों को मारना और प्रभावित इलाकों को कीटाणु मुक्त करना शुरू कर दिया है. यह कदम उस वक्त उठाया गया है, जब गांसु प्रांच और शिनिजियांग के उइघुर इलाके में 6,229 मवेशी इस बीमारी के चपेट में आ गए हैं.
SAT-1 सेरोटाइप नामक बीमारी चीन में पाई गई है, इसका ओरिजिन दक्षिण अफ्रीका के इलाके
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यह पहली बार है, जब SAT-1 सेरोटाइप नामक बीमारी चीन में पाई गई है. यह आमतौर पर दक्षिण अफ्रिका में पाई जाती है. चीन में मौजूद वैक्सीन इस बीमारी से सुरक्षा न देने में सक्षम नहीं है. साल 2025 के बाद से SAT-1 अफ्रीका से निकलकर मध्यपूर्व, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में पहुंच चुका है. अधिकारियों का कहना है कि यह बीमारी चीन में उत्तर पश्चिमी सीमा के रास्ते आई है. यह सीमारेखा कजाकिस्तान, मंगोलिया, रूस और अन्य देशों से जुड़ती है.
इसके अलावा शिनजियांग और गांसु जैसे सीमावर्ती राज्यों को निर्देश दिए गए हैं, कि अपनी गश्त को बढ़ाएं और तस्करी या अवैध ट्रांसपोर्ट गतिविधि के जरिए इस बीमारी को देश में एंट्री करने से रोकें. शंघाई के जेसी इंटेलिजेंस कंपनी के एक्सपर्ट्स रोजा वांग का कहना है कि इस समय फैली यह बीमारी एक बड़े इलाके के लिए खतरा बन गई है. इसको कंट्रोल करना बेहद ही जरूरी है.
यह बीमारी तेजी से फैलती है, 50 प्रतिशत से ज्यादा मृत्यु दर
चीन की तरफ से कहा गया है कि यह सेरोटाइप नामक बीमारी तेजी से फैलती है. इससे प्रोडक्शन पर असर पड़ता है. छोटे-छोटे जानवर इसकी चपेट में जल्दी आते हैं. करीबन 50 प्रतिशत से ज्यादा इस बीमारी की मृत्यु दर है. यह सीधे संपर्क से फैलती है. इसके अलावा हवा से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. चीन ने बताया कि इस बीमारी को खत्म करने के लिए दो वैक्सीन के इमरजेंसी ट्रायल की मंजूरी मिल गई है. यह टीके एक महीने के भीतर बाजार में उपलब्ध होंगे. चीन वैसे ही पशुधन सेक्टर में नुकसान झेल रहा है. इसमें मांस की गिरती कीमतें, जरूरत से ज्यादा उत्पादन, और कमजोर मार्केट डिमांड जैसी समस्याएं शामिल हैं. अब मवेशियों की कीमतें गिरने का भी खतरा मंडरा रहा है.
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