शांति वार्ता के बीच अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर 11 अप्रैल को अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है. अमेरिकी सेनाओं ने होर्मुज से बारूदी सुरंगे हटाने के ऑपरेशन को अंजाम देना शुरू कर दिया है. यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दी है. यहां अमेरिकी नौसेना के दो गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर जहाजों ने ऑपरेशन शुरू किया है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन (DDG121) और USS माइकल मर्फी (DDG 112) से गुजरे हैं. साथ ही अरब की खाड़ी में ऑपरेशन को अंजाम दिया है. इसका मकसद होर्मुज ईरान के IRGC की तरफ से बिछाई समुद्री बारूदी सुरंगे से पूरी तरह साफ है.
CENTOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कपूर ने कहा है कि हमने एक नया रास्ता बनाने की प्रक्रिया शुरू की है. हम जल्द ही इस सुरक्षित रास्ते को मेरिटाइम इंडस्ट्री यानी समुद्र उद्योग के साथ शेयर करेंगे. इससे व्यापारिक आवागमन बिना किसी बाधा के चलता रहे.
कपूर का कहना है कि होर्मुज एक इंटरनेशनल समुद्री मार्ग और एक जरूरी व्यापारिक गलियारा है. यह क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक समृद्धि में योगदान देता है. आने वाले दिनों में पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन सहित और भी अमेरिकी सेनाएं इस अभियान में शामिल होंगी.
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता
इधर, पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है. इस वार्ता को 5 घंटे से ज्यादा समय हो गया है. फिलहाल किसी तरह के नतीजे पर यह चर्चा नहीं पहुंची है.
ट्रंप ने भी दिया था बयान
ट्रंप ने कहा कि उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है. उनकी वायु सेना खत्म हो चुकी है. उनका एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम लगभग नहीं के बराबर है. रडार बंद हो चुके हैं. उनकी मिसाइल और ड्रोन फैक्ट्रियां काफी हद तक नष्ट कर दी गई हैं. साथ ही मिसाइल और ड्रोन भी और सबसे महत्वपूर्ण बात, उनके ऊंचे कद के नेता अब इस दुनिया में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि अब उनके पास बस एक ही चीज बची है. यह खतरा कि कोई जहाज उनकी समुद्री बारूदी सुरंग से टकरा सकता है. उनकी सभी 28 माइन बिछाने वाली नौकाएं भी समुद्र की तह में पड़ी हैं.
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