पेट्रोल-डीजल होगा और महंगा! संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी, होर्मुज विवाद नहीं सुलझा तो आएगा खाद्य संकट


संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने बुधवार (20 मई 2026) को दुनिया को गंभीर खाद्य संकट की चेतावनी दी है.  FAO के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास बने तनाव और अन नीनो की आशंका मिलकर दुनिया को अगले एक साल के भीतर खाद्य संकट की ओर धकेल सकता है. संगठन का कहना है कि यह सिर्फ तेल टैंकरों या जहाजों की आवाजाही का मामला नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक खाद्य व्यवस्था को हिलाने वाला संकट है, जिसका असर सीधे आम लोगों की थाली तक पहुंचेगा.

तेल कीमतों में होगा इजाफा: FAO

एफएओ के मुताबिक, संकट की शुरुआत तेल कीमतों से होगी, फिर खाद और बीज महंगे होंगे, खेती की लागत बढ़ेगी, पैदावार घटेगी और आखिरकार भोजन की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी. अप्रैल में वैश्विक खाद्य कीमतें लगातार तीसरे महीने बढ़ीं, जिससे संकट के शुरुआती संकेत साफ दिखने लगे हैं. साथ ही चिंता इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि इसी दौरान अल नीनो के सक्रिय होने की आशंका 82 फीसदी तक पहुंच गई है, जिससे कई देशों में सूखा और अनियमित बारिश हो सकती है.

दुनिया में आएगा खाद्य संकट: FAO

एफएओ ने कहा है कि आने वाले महीनों में सरकारों और किसानों के फैसले तय करेंगे कि दुनिया खाद्य महंगाई झेलेगी या भूख का सामना करेगी. अगर अभी वैकल्पिक व्यापार मार्ग, कमजोर परिवारों के लिए राहत और किसानों को आर्थिक मदद जैसे कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट करोड़ों लोगों की रसोई और जीवन पर भारी पड़ सकता है.

FAO के Agrifood Economics डिविजन के डायरेक्टर डेविड लाबोर्डे के अनुसार, इस संकट को कम करने के लिए तुरंत सऊदी अरब, लाल सागर (Red Sea) और अरब प्रायद्वीप के रास्ते वैकल्पिक जमीन और समुद्री मार्ग खोजने होंगे. साथ ही, प्रमुख उत्पादक देशों को अनाज और खाद के निर्यात पर रोक लगाने से बचना होगा, ताकि मानवीय सहायता के रूप में जाने वाला भोजन न रुके.

संयुक्त राष्ट्र ने दी ये सलाह

  • मिश्रित खेती को बढ़ावा: एक साथ अनाज और दलहन (दालें) उगाने को बढ़ावा दिया जाए, ताकि महंगे नाइट्रोजन वाले रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो.
  • सीधा और सटीक सपोर्ट: सरकारें सभी को अंधाधुंध सब्सिडी देने के बजाय केवल गरीब परिवारों और छोटे किसानों को डिजिटल रजिस्टर के जरिए सीधे उनके खाते में मदद पहुंचाएं.
  • सामाजिक सुरक्षा: लैटिन अमेरिका के अनुभवों से सीखते हुए गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तुरंत लागू की जाएं.

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