ईद उल अजहा पर होर्मुज स्ट्रेट में भड़की चिंगारी! अमेरिका ने ईरान पर किए ताबड़तोड़ हमले, ड्रोन भी मार गिराए


US Iran Conflict: अमेरिकी सेना ने ईरान में एक बार फिर बड़े सैन्य हमले किए हैं. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रातभर चले इन हमलों में उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें अमेरिकी सेना अपने सैनिकों और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा मान रही थी.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि अमेरिकी सेना ने कई ईरानी ड्रोन को भी मार गिराया, जिन्हें संभावित खतरा माना जा रहा था.

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव

बताया गया है कि अमेरिकी कार्रवाई मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की गतिविधियों को लेकर की गई. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. अमेरिका का कहना है कि ईरानी सैन्य गतिविधियां और ड्रोन मूवमेंट वहां से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और अमेरिकी बलों के लिए खतरा बन रहे थे.

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तीन महीने से जारी है युद्ध

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पिछले तीन महीनों से लगातार बढ़ता जा रहा है. इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हुई थी. इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि वैश्विक ऊर्जा बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है.

शांति वार्ता के बीच हुई नई कार्रवाई

यह नए हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब दोनों पक्षों के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत चल रही है. इस बीच ईरानी सरकारी मीडिया में दावा किया गया था कि संभावित शांति समझौते के तहत ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग संचालन संभाल सकते हैं. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दावे को खारिज कर दिया. ट्रंप ने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा और वहां अंतरराष्ट्रीय आवाजाही जारी रहेगी.

इससे पहले भी कर चुका है अमेरिका हमला

अमेरिका ने सोमवार को भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसे उसने “रक्षात्मक हमला” बताया था. हालांकि ईरान ने इसे दोनों देशों के बीच जारी नाजुक युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया था. अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के मुताबिक, उस कार्रवाई में उन नौकाओं और मिसाइल लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया गया था, जो अमेरिकी बलों के लिए खतरा पैदा कर रही थीं.

 



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