ED ने म्यांमार से भारत में अवैध रूप से लाई जा रही सूखी सुपारी की तस्करी और उससे जुड़े करीब 970 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ED की आइजोल सब-जोनल ऑफिस टीम ने गुरुवार (4 जून) को मिजोरम के चम्फाई जिले में 9 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की.
ये कार्रवाई PMLA के तहत की गई. छापे स्थानीय कारोबारियों और कथित तौर पर तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोगों के घरों और व्यावसायिक परिसरों में मारे गए. ED की जांच की शुरुआत सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, इंफाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी. ये एफआईआर म्यांमार से भारत में सूखी सुपारी की बड़े पैमाने पर तस्करी से जुड़े मामले में दर्ज की गई थी. इस मामले की जांच का आदेश गुवाहाटी हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था.
जांच में सामने आया कि म्यांमार के नागरिक तिआउ नदी के रास्ते बिना किसी कस्टम क्लीयरेंस के सूखी सुपारी भारत में लाते थे. ये माल मिजोरम के जोखावथार और चम्फाई इलाके में स्थानीय सहयोगियों को सौंपा जाता था. इसके बाद सुपारी को चम्फाई के गोदामों में रखा जाता और फिर ट्रकों के जरिए असम-मिजोरम सीमा पर स्थित वैरेंगटे तक पहुंचाया जाता था. इस पूरे नेटवर्क को असम के सिलचर स्थित व्यापारी और फाइनेंसर आर्थिक मदद देते थे. इनके द्वारा बैंकिंग चैनलों के जरिए बड़ी रकम मिजोरम में मौजूद सहयोगियों के खातों में भेजी जाती थी.
ED के मुताबिक म्यांमार के सप्लायर्स को भारतीय मुद्रा में भुगतान किया जाता था, जिसे बाद में सीमा के पास काम करने वाले मनी एक्सचेंजर्स के जरिए म्यांमार की मुद्रा में बदला जाता था. जांच में ये भी सामने आया कि साल 2021 से 2024 के बीच चम्फाई जिले में सुपारी के परिवहन के लिए 251.19 करोड़ रुपये के SGST और 86.25 करोड़ रुपये के CGST से जुड़े ई-वे बिल जारी किए गए. ये ई-वे बिल कथित तौर पर फर्जी प्लांटेशन सर्टिफिकेट और नकली कस्टम क्लीयरेंस दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे.
ED ने पाया कि जिन बागान मालिकों के नाम पर दस्तावेज तैयार किए गए थे, वे GST में पंजीकृत ही नहीं थे. ED के मुताबिक तस्करी में शामिल स्थानीय लोगों को प्रति किलो सुपारी पर 2 से 15 रुपये तक कमीशन दिया जाता था. ये लोग माल की खरीद, परिवहन, सुरक्षा और कस्टम से जुड़ी प्रक्रियाओं में मदद करते थे.
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ED ने खुलासा किया कि जब कस्टम विभाग सुपारी की खेप जब्त कर लेता था, तब कुछ स्थानीय लोगों को सामने लाकर उन्हें माल का दावा करने वाला दिखाया जाता था. इसके बदले उन्हें लाखों रुपये दिए जाते थे. कई मामलों में कस्टम अधिकारियों के सामने यह दिखाने के लिए कि माल कानूनी रूप से आयात किया गया है. फर्जी और असंबंधित बिल ऑफ एंट्री भी पेश किए गए.
बैंक खातों की जांच में ED को पता चला कि वर्ष 2013 से 2025 के बीच आरोपियों के विभिन्न खातों के जरिए 970 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध रकम का लेन-देन हुआ. एजेंसी का मानना है कि यही रकम इस तस्करी नेटवर्क से अर्जित अपराध की कमाई यानी Proceeds of Crime है.
छापेमारी के दौरान ED ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए है. .इनमें जमीन और संपत्तियों के कागजात, कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल है. एजेंसी अब इन दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते है.
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