इंटरनेट बंद, गिरफ्तारियां चालू… PoK में भयंकर बवाल, ब्रिटिश सांसदों ने आईना दिखाया तो बौखलाया पाकिस्तान


पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और संचार सेवाओं पर कथित पाबंदियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ने लगी है. ब्रिटेन के सांसद Iqbal Mohamed ने क्षेत्र की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि कई ब्रिटिश नागरिक अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनमें भारी बेचैनी और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है.

एक वीडियो संदेश में सांसद इकबाल मोहम्मद ने कहा कि उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहने वाले उनके रिश्तेदारों और प्रियजनों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है. उन्होंने कहा कि संचार बंदी, गिरफ्तारियों और बढ़ते तनाव की खबरें बेहद चिंताजनक हैं.

ब्रिटिश सांसद ने विशेष रूप से उन रिपोर्टों का उल्लेख किया जिनमें ब्रिटिश नागरिकों की गिरफ्तारी, संचार प्रतिबंध और पाकिस्तानी अधिकारियों तथा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बीच संवाद टूटने की बात कही गई है. उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संचार तक पहुंच लोकतांत्रिक समाज के मूल सिद्धांत हैं और तनावपूर्ण परिस्थितियों में इन अधिकारों का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.

इकबाल मोहम्मद ने पाकिस्तान सरकार से तत्काल संचार सेवाएं बहाल करने, सभी प्रतिबंध हटाने और विवादों का समाधान शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से करने की अपील की. उन्होंने कहा कि उन्होंने कश्मीर पर बनी सर्वदलीय संसदीय समिति (APPG on Kashmir) के अन्य सांसदों के साथ मिलकर ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है.

पत्र में ब्रिटिश सरकार से पीओजेके की स्थिति का आकलन स्पष्ट करने, प्रभावित ब्रिटिश नागरिकों और उनके परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने तथा पाकिस्तान पर तनाव कम करने के लिए राजनयिक दबाव बनाने की मांग की गई है. सांसद ने कहा कि ब्रिटेन को सभी उपलब्ध कूटनीतिक माध्यमों का उपयोग कर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.

POK पर सवालों से असहज पाकिस्तान, मौतों पर चुप्पी और आलोचकों पर हमला, कहा- यह हमारा आंतरिक मामला

PoK में विरोध प्रदर्शनों, फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद होने और गिरफ्तारियों को लेकर ब्रिटेन के कुछ सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों पर पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इस्लामाबाद ने इन टिप्पणियों को “अनावश्यक” और “तथ्यों से परे” बताते हुए कहा कि आजाद जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा.

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों, कथित संचार बंदी और लोगों की मौतों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पाकिस्तान सरकार ने जवाब देने के बजाय आलोचकों पर ही निशाना साधा है. ब्रिटिश सांसदों और प्रवासी कश्मीरी समुदाय की चिंताओं को “गैर-जिम्मेदाराना” बताने वाले इस बयान में इस बात का कोई उल्लेख नहीं किया गया कि प्रदर्शनकारियों की मौतों और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की जांच कैसे होगी.

परिवार की सुरक्षा को लेकर सवाल 

इस्लामाबाद ने अपने बयान में कानून-व्यवस्था और संप्रभुता की बात तो की, लेकिन उन परिवारों की पीड़ा पर चुप्पी साध ली जो अपने परिजनों से संपर्क न होने और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. पाकिस्तान ने उल्टा ब्रिटिश सांसदों पर ही “तथ्यों की जानकारी न होने” का आरोप लगाया.

विश्लेषकों का मानना है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठ रही है, तब पाकिस्तान सरकार का यह रुख कई नए सवाल खड़े करता है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सब कुछ सामान्य है तो संचार प्रतिबंध, गिरफ्तारियों और मौतों को लेकर उठ रही चिंताओं का खुलकर जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा.

यह भी पढ़ें : India Bloc Meeting: 2029 के लिए 450 सीटों पर बात और 5 बड़े संकल्प, गठबंधन की बैठक में क्या-क्या हुआ, पढ़ें इनसाइड स्टोरी





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *