‘भारतीय विरोधी नारों और झंडे फाड़े जाने की निंदा करते हैं’, टेक्सास में इंडियन-अमेरिकी लॉमेकर्स ने कहा


अमेरिकी कांग्रेस के छह भारतीय-अमेरिकी सदस्यों ने टेक्सास के फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर इमिग्रेशन से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन के दौरान भारतीय झंडा फाड़े जाने की कड़ी निंदा की है. साथ ही, जेनोफोबिया (विदेशियों के प्रति नफरत) और भारत-विरोधी बयानों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ एकजुटता भी जताई है.

भारत-विरोधी नारों और बयानों वाले एक विरोध प्रदर्शन के दौरान जब एक प्रदर्शनकारी ने भारतीय झंडा फाड़ दिया, तो प्रतिनिधि राजा कृष्णमूर्ति, अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम ने एक संयुक्त बयान जारी किया. इस घटना ने सोशल मीडिया पर काफी ध्यान खींचा और पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं.

लॉमेकर्स ने कहा, ‘हम सभी अमेरिकियों के अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार का पुरजोर समर्थन करते हैं. साथ ही, हम फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर भारत-विरोधी नफरत भरे बयानों के साथ भारतीय झंडा फाड़े जाने की निंदा करते हैं, क्योंकि ऐसी हरकतें भारत-विरोधी हिंसा और जेनोफोबिया को बढ़ावा देती हैं. किसी भी समुदाय को निशाना बनाकर नफरत और डराने-धमकाने वाली हरकतें अस्वीकार्य हैं और हमारे देश में इनके लिए कोई जगह नहीं है.’

बयान में आगे कहा, ‘भारतीय-अमेरिकी समुदाय हमारे देश का एक अहम हिस्सा है और उन्हें सुरक्षित और सम्मानित महसूस करने का हक है. जब भारतीय-अमेरिकियों और दक्षिण एशियाई-अमेरिकियों को उत्पीड़न, जेनोफोबिया (विदेशियों के प्रति नफरत) और नफरत भरी बातों का सामना करना पड़ता है, तो नेताओं को साफ तौर पर कहना चाहिए कि किसी भी समुदाय को नफरत का निशाना बनाने को बर्दाश्त या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.’

कांग्रेस के सदस्यों ने टेक्सास और पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया. उन्होंने कहा, ‘हम फ्रिस्को और पूरे देश में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ एकजुटता से खड़े हैं. हर किसी को सम्मान और सुरक्षा के साथ, बिना किसी डर, उत्पीड़न और भेदभाव के जीने का हक है.’

ये छह सांसद भारतीय-अमेरिकी सदस्यों का अब तक का सबसे बड़ा समूह हैं, जो एक साथ अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में काम कर रहे हैं. इन्होंने मिलकर अक्सर उन मुद्दों पर बात की है जिनका असर प्रवासी समुदायों, नागरिक अधिकारों और अमेरिका में बढ़ती भारतीय-अमेरिकी आबादी पर पड़ता है.

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आज भारतीय-अमेरिकियों की संख्या 50 लाख से अधिक है और वे अमेरिका में सबसे ज़्यादा पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से सफल जातीय समुदायों में से एक हैं. इस समुदाय ने कांग्रेस, राज्य विधानसभाओं, स्थानीय सरकारों और बिजनेस व टेक्नोलॉजी के ऊंचे पदों पर अपनी बढ़ती भागीदारी के साथ राजनीतिक प्रभाव भी लगातार बढ़ाया है.

डलास के उत्तर में स्थित फ्रिस्को में पिछले दो दशकों में तेज़ी से आबादी बढ़ी है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी रहते हैं. यह शहर टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, फाइनेंस और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए एक अहम केंद्र बन गया है, जो टेक्सास और पूरे अमेरिका में भारतीय समुदाय के बढ़ते विस्तार को दिखाता है.

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